चड़ोल। सरस्वती शिशु मन्दिर की शिक्षण व्यवस्था में भैया, बहिनों के अंदर छिपी प्रतिभा और सभी कौशल को निखारकर सर्वांगीण विकास की ओर अग्रसर करना है। आदर्शतम शिक्षण तब तक पूर्ण नही माना जाता है जब तक कि उसमें संस्कारों का दर्शन नही हो। आज कल की युवा पीढ़ी आधुनिकता की चकाचौंध में भृमित हो गई है उन्हें सही राह व मार्गदर्शन संस्कारों के माध्यम से ही कराया जा सकता है सरस्वती शिशु मन्दिर भैया, बहिनों के उन सभी पहलुओं में निखार लाता है जिससे विकट से विकट चुनोतियो का सामना भी सुगमता से हो सकें।
उक्त विचार विद्या भारती के निर्देशन में ग्राम भारती शिक्षा समिति मालवा द्वारा मार्गदर्शित नीमच जिला ग्राम विकास शिक्षण समिति द्वारा संचालित सरस्वती शिशु मंदिर चड़ोल में कक्षा अष्टम के भैया, बहिनों के दीक्षांत समारोह में विद्यालय प्रधानाचार्य दिलीप पाटीदार जावी ने व्यक्त किए। कार्यक्रम के विधिवत शुभारंभ के पश्चात कक्षा अष्टम के भैया, बहिनों ने उनके अनुभव सांझा किए और सरस्वती शिशु मंदिर से जो संस्कार और जीवन मूल्यों की सीख सीखी है उसको जीवन में अमल करने का संकल्प लिया ततपश्चात कक्षा अष्टम के भैया, बहिनों द्वारा विद्यालय में उपयोग हेतु 6 कुर्सियां भेंट की। कक्षा पंचम, षष्टम एवं सप्तम के भैया, बहिनों ने कक्षा अष्टम के भैया, बहिनों को शिक्षण सहयोगी सामग्री भेंट की और सभी भैया, बहिनों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम में विशेष रूप से विद्यालय परिवार से सहा. आचार्य कमलेश धाकड़, सहा. दीदी पायल कुंवर, आशा कुंवर, संजू कुंवर, राधा बाई सेन (भुआजी) सहित विद्यालयीन भैया, बहिन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन आनन्ददायक अल्पाहार के बाद हुआ। उक्त जानकारी विद्यालय के प्रचार प्रमुख कमलेश धाकड़ ने दी।