सरवानिया महाराज। समय दर समय प्रकृति का दंश सहने वाला अन्नदाता ने पहले पाला पड़ने से फसलों की बर्बादी देख खुन के आंसू रोया और अब इस बार गर्मी के सीजन में फसलें पकने के समय से ही बिन बुलाई बरसात के कारण दुःखी हो गया है। अन्नदाता की खरी मेहनत पर रह रहकर गिर रहे पानी और ओलावृष्टि से पानी फिर गया है। गैहूँ , चना , धनिया , चिवा , धान अफिम , कलोंजी की फसलें बर्बाद हो गई। हवा और पानी से मौसम एक बार फिर ठंडा हो गया।
रामनवमी पर जंहा लोग आस्था के साथ माता की नोराते तथा कुल देवी देवताओं का पूजन करने में मशगूल थे कि इस बीच तेज हवा के साथ बारिश ने अंचल को भिगो दिया। जिसके चलते शहर का मौसम ठंडा हो गया। हालांकि समाचार लिखे जाने तक हवा के साथ हल्दी बुंदाबांदी हो रही थी। मोसम ने तेज हवाओं और बारिश से किसानों को एक बार फिर से परेशानी में डाल दिया फसलें बर्बाद करने के बाद अब पानी घास फूस चारा सुखला खराब करने पर तूल गया है।