जावरा। चैत्री नवरात्रि का समापन राम नवमी के साथ होता है। ऐसा कहते हैं कि रामनवमी के दिन भगवान श्री राम का धरती पर जन्म हुआ था। श्रीराम मध्य दोपहर में कर्क लग्न और पुनर्वसु नक्षत्र में पैदा हुए थे। भगवान राम के जन्म की इस तारीख का जिक्र रामायण और रामचरित मानस जैसे तमाम धर्मग्रंथों में किया गया है। श्री राम स्वयं भगवान विष्णु का सातवां अवतार थे। वहीँ सम्पूर्ण भारत देश में रामनवमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है।
वही आपको बता दें कि जावरा में गुरुवार को रामनवमी के उपलक्ष्य में हिंदू महाकुंभ का आयोजन हुआ। सैकड़ों की संख्या में राम भक्त मठ मंदिर मालीपुरा पर एकत्रित हुए। यहां बाहर से पधारे संतों का संबोधन हुआ। इसके बाद श्री रामजी की महा आरती कर सभी राम भक्त एक साथ शोभायात्रा में निकले। सड़कों पर जय श्री राम के जयकारे गूंज उठे। वही शोभायात्रा में ढोल डीजे बैंड नगाड़े एवं बाहर की कई पार्टियों ने अपनी ऐतिहासिक प्रस्तुति दी वही शोभायात्रा का अनेक स्थानों पर स्वागत हुआ। कही तोरण द्वार लगाकर तो कहीं फुलों से,पानी से तो कही गुलाब शरबत से स्वागत किया।
वही हनुमान चालीसा समिति के सदस्यों ने आयोजन को ऐतिहासिक एवं भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। भस्म भक्त मंडल सहित ढोल-नगाड़े पर सैकड़ों युवाओं ने नृत्य किया। श्रीराम दरबार के रथ के साथ सैकड़ों कार्यकर्ता अपने हाथों में भगवा ध्वज को लहराते हुए जय श्री राम के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। वहीं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के कई लोग इस शोभायात्रा में शामिल हुए। यात्रा में क़रीब सैकड़ों की संख्या में राम भक्तों के शामिल होने की जानकारी सामने आई। भीड़ में किसी तरह की अप्रिय घटना को होने से रोकने व संपूर्ण सुरक्षा मुहैया कराने के उद्देश्य से जावरा शहर के मुख्य पथों समेत अलग अलग जगह पुलिस बल काफी मुस्तैद रही संपूर्ण शोभायात्रा में वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
वही शोभायात्रा से पूर्व दोपहर क़रीब 12 बजे के आस पास मालीपुरा मठ मंदिर में रामजी की महा आरती के बाद प्रसादी वितरित हुई। श्री हनुमान चालीसा समिति के राजेंद्र मंडलोई ने बताया कि प्रमुख वक्ता आचार्य रामस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज (उज्जैन), मुकेश मोलवा (अंतरराष्ट्रीय ओजस्वी कवि), विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुकुमचंद सांवला उपदेश राणा आदि संपूर्ण कार्यक्रम में मौजूद रहे।