भोपाल। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि सिंध, सिंधु और सिंधी बढ़ेगा, चमकेगा। आप भारत से भारत में आए। ये केवल कृत्रिम विभाजन था। आप तब भी भारत में थे, अब भी भारत में हैं। पूरा हिंदोस्तां आपका है। इसके लिए नई पीढ़ी को तैयार रहना होगा। हमें अपनी जमीन को नहीं भूलना चाहिए। उससे जुड़ाव रखना चाहिए।
मोहन भागवत भोपाल में अमर शहीद हेमू कालाणी के जन्मशताब्दी वर्ष के समापन कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। भेल दशहरा मैदान पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हेमू कालाणी ने लोगों को जीवन की राह बताकर जीवन बलिदान कर दिया। उन्हें विदेशियों का राज नहीं चाहिए था। आप सिर्फ उस भारत से इस भारत में आए। आप तभी भी भारत में थे। ये अपना देश है। ये केवल हमने उस जमीन काे शारीरिक दृष्टि से छोड़ दिया।
सिंधु एक संस्कृति है। वहां वेदों के उच्चारण होते थे। हमको भारत को बसाना है। भारत खंडित हो गया। जरूरी नहीं कि हम मन से उसे छोड़ें, क्योंकि हमारे साथ उस भूमि का जुड़ाव बना रहे। हम सिंधु सभ्यता को नहीं भूल सकते। सिंधु नदी के सूक्त वेदों में है। ये नाता हम नहीं तोड़ सकते। हम सिंधु को सिंध प्रदेश को नहीं भूलेंगे। क्योंकि ये विभाजन कृत्रिम है। उस समय योगी अरविंद ने कहा था कि आज जिसको हम पाकिस्तान कहते हैं, उसके लोग कहते हैं कि गलती हो गई। ये सब मानते हैं। अपनी हठधर्मिता के कारण भारत से अलग हो गए, संस्कृति से अलग हो गए। क्या वे सुखी हैं?
भारत के साथ रहने के लिए जो यहां आए, उन्होंने पुरुषार्थ से खुद को खड़ा कर लिया। क्योंकि वे कृत्रिम जीवन में जी रहे हैं। अखंड भारत सत्य है, खंडित भारत दु:स्वप्न है। वहां फिर से उस भारत को बसाना पड़ा है। फिर से बारी आएगी, तो आप वहां भारत को बसा सकते हो, इसलिए पहली आवश्यकता है कि उनके जीवन की प्रमाणिकता को ध्यान में रखना। उनकी अकूत देशभक्ति को ध्यान में रखना। सर्वस्व त्याग के लिए उनकी जो तैयारी थी, उसे ध्यान में रखना। ये पहली आवश्यकता है। सिंध को नहीं भूलना। यानी नई पीढ़ी का लगाव वहां से जोड़ना पड़ेगा। इसलिए समाज के साथ कदम से कदम बढ़ाना।
आदिकाल से देश के प्रगति के प्रथम कदम से सिंधु और सिंध का सहभाग रहा है। आज भी वो आपको होना पड़ेगा। सुविधाओं का दौर चलता रहेगा। संपूर्ण दुनिया को सुख-शांति देने वाला भारत चलते रहना चाहिए। सिंध, सिंधु और सिंधी बढ़ेगा, और चमकेगा। उतार चढ़ाव चलते रहेंगे, लेकिन हम कभी मिटेंगे नहीं। क्योंकि हम स्वार्थों और अहंकारों के साथ नहीं रहते। हम प्रयोजन के साथ चलते हैं। नई पीढ़ी को इसका भान हो। वो भटके नहीं, इसकी चिंता करें। सिंधी समाज में पुरुषार्थ देखने को मिलता है। आरएसएस आपकाे सदा सहायता के लिए तत्पर मिलेगा।
सीएम शिवराज सिंह भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे। उन्होंने 'आयो लाल सभय चलो'... से भाषण की शुरुआत की। सीएम ने कहा कि धर्म, संस्कृति के लिए अपनी धरती छोड़ दी, इसलिए आप अभिनंदनीय हैं। परिश्रम और उद्यमशीलता में सिंधी समाज का मुकाबला नहीं। यह समाज हर संकट में गिरकर भी उठ कर खड़े होने का सामर्थ्य रखता है।
सीएम शिवराज ने कहा कि हेमू कालाणी की जीवनी सिलेबस में शामिल की जाएगी। बच्चाें को सिंधी समाज के संतों से रूबरू कराएंगे। अगले महीने से सिंधु दर्शन कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसके लिए 25 हजार रुपए प्रति तीर्थयात्री अनुदान दिया जाएगा। प्रदेश में सिंधी साहित्य अकादमी का बजट बढ़ाकर 5 करोड़ किया जाएगा। मनुआभान की टेकरी पर हेमू कालाणी की प्रतिमा लगाई जाएगी। जबलपुर, इंदौर में सिंधी बाहुल्य क्षेत्रों में हेमू कालाणी की प्रतिमा लगाई जाएगी।