मुरैना। इस बार पूरे देश भर में 6 अप्रैल गुरुवार को हनुमान जयंती मनाई जायेगी। ऐसे में मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में हनुमान जयंती को लेकर मुरैना के सभी हनुमान मंदिरों में विशेष तैयारियां शुरू हो गयी हैं। इस बार हनुमान जयंती को लेकर सभी मंदिरों में विशेष तैयारियां हो रही हैं। क्योंकि बीते 2 सालों से कोरोना संकट को लेकर हनुमान जयंती नहीं मनाई गई थी। जिस कारण इस बार हनुमान भक्त काफी खुश और उत्साहित दिख रहे हैं। मंदिरों के प्रांगण में अभी से भक्तों ने पहुंचना शुरू कर दिया है और अपने ही हाथों से मंदिर की साफ सफाई लगातार करते दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद मंदिरों को एक सुंदर तरीके से और लाइटिंग से सजाया जाएगा। जिसके बाद 6 अप्रैल को हनुमान जयंती पर विशेषकर हनुमान जी को विशेष श्रृंगार के रूप में उनको सजा कर उनकी पूजा-अर्चना की जाएगी। उसके बाद यहां पर कई सैकड़ा हवन की तैयारियां शुरू हो चुकी और हवन होने के के बाद यहां पर विशेष प्रसादी बांटी जाएगी।
इस बार हनुमान जयंती के पर्व पर मुरैना के हनुमान मंदिर घिरौना सरकार की बात कर रहे हैं। मुरैना शहर से करीब 5 किलो मीटर दूर नेशनल हाइवे किनारे स्थित यह मंदिर करीब 100 वर्ष से अधिक पुराना है। इस मंदिर की विशेषता है कि यहां पर जो भी भक्त एक बार अगर मनोकामना लेकर आता है, उसकी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। वहीं मंदिर की स्थापना करने वाले संत प्रेमदास महाराज का आशीर्वाद जिस किसी को भी मिल जाए उसका जीवन धन्य हो जाता है। हनुमानजी के साथ साथ मंदिर प्रांगण में कई देवी-देवताओं की मूर्तियां विराजमान हैं भक्तगण जिनके दर्शन कर धर्म लाभ प्राप्त करते हैं।
इस बार हनुमान जयंती को लेकर मंदिर मे तैयारी शुरू हो चुकी है अभी से मंदिर की साफ सफाई शुरू हो गयी है और हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी महाराज का विशेष शृंगार किया जाएगा। यहाँ पर विद्वान आचार्य पवनसुत महा रुद्राभिषेक भी करेंगे। घिरौना सरकार के हनुमान मंदिर पर हनुमान जी का जन्मोत्सव सुबह 5:00 बजे मंगल आरती के साथ ढोलक और मजीरों की धुनों के साथ होगा। उसके बाद पवनसुत महा रुद्राभिषेक किया जाएगा। इस दौरान मंदिर को रंग बिरंगी लाइटों से सजाया जाएगा।
उसके बाद यहां पर हनुमान जन्म उत्सव बड़ी धूमधाम से शुरू होगा यहां पर संगीत में सुंदरकांड शुरू होगा उसके बाद मंदिर प्रांगण में सैकड़ों श्रद्धालुओं द्वारा हवन किया जायेगा हर साल हनुमान जन्म महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं के लिए यहां भंडारा होता है और इस भंडारे में प्रसादी ग्रहण करते है।