नीमच। भगवान प्रेमभाव के भुखे होते संपत्ति के नहीं। परिवार के प्रति कर्तव्य भाव से प्रेम पूर्वक की गई सेवा ही पवित्र धर्म होता है।समाज की कुरीतियों से मुक्ति मिले वही सच्चा धर्म होता है। प्रेम का झरना हमारी अंतरात्मा में है बाहर नहीं मिलता। करोड़पति के परिवार जन भी सरल होना चाहिए तभी सम्मान मिलेगा। हमें जितना मिला है हमें उसी में संतोष करना चाहिए। संतोषी सदा सुखी होता है। संत जीते जागते ही संसार छोड़ता है।।यह बात बालाजी कुड़ीमंदिर सेवा विकाससमिति, कानाखेड़ा, बिजलवास बामनिया, रातड़िया के तत्वावधान में हनुमान जयंती के उपलक्ष में विशाल मेला धर्म सभा में विश्वनाथ गुरुकुल उज्जैन वाले कथा प्रवक्ता भागवताचार्य, व्याकरण आचार्य श्री रामानंद शास्त्री ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि जहां परमात्मा की भक्ति के प्रति प्रेम होता है वहां जीवन में आनंद ही आनंद होता है।युवा विद्यार्थी ब्रह्मचर्य का पालन कर शिक्षा के साथ संस्करण को भी ग्रहण करें तो उनका जीवन सफल हो सकता है।विरोध बिना मानव शक्तीशाली नहीं बनता है। भागवत कथा का अर्थ है कि सर्जन कॉल निर्माण की ओर अग्रसर करना। श्री कृष्ण गोपियों को प्रेम तत्वों के संस्कार सिखाना चाहत थें। गोपिया श्री कृष्ण की भक्तिमय बांसुरी की धुन में इतनी डूब जाती कि अपने दिनचर्या के कार्य प्रति बेसुध हो जाती थीं। कान का गहना नाक में पहन लेती थी।गोपिया भक्ति के साथ सारा कार्य करती रहती है।यहीं परिवार की सेवा का सच्चा धर्म भी होता है। किसानों को प्रेम पुरुषार्थ के साथ खेती करते हुए भी प्रेम पूर्वक जीवन जीना चाहिए। अर्थी में सवार होकरघ् जाने वाला संसार से हमेशा के लिए विदा हो जाता है। डोली परघ् सवार बहू संसार में परिवार बसाने के लिए बढती है। रास ब्रह्मदर्शन होता है। नृत्य नहीं होता है। मुर्तिकार पत्थर को तरासता है उसमें परमात्मा के स्वरुप का निखार होता है। इस अवसर पर भागवत पोथी पूजन आरती में विधायक दिलीप सिंह परिहार कांग्रेस नेता जिला पंचायत सदस्य तरुण बाहेती भी उपस्थित थे।
कृष्ण रुक्मणी विवाह में झूमे श्रद्धालु,
भागवत कथा के मध्य जब महाराज श्री ने कृष्ण रुक्मणी विवाह कथा का प्रसंग बताया तो सभी श्रद्धालु ने जय जय श्री कृष्ण की जय घोष लगाई। कृष्ण रुक्मणी विवाह नाटिका में श्री कृष्ण का अभिनय सुश्री ज्योति नागदा तथा रुक्मणी का अभिनय सुश्री पायल पुरोहित ने निभाया।
मेले में भी उत्साह दिखाया भक्तों ने,
भागवत कथा परिसर में मेला भी स्थापित किया गया है जिसमें मनोरंजन के लिए झूला चकरी भी स्थापित की गई है और अनेक स्थानों पर खिलौने आदि की बिक्री के लिए टेंट की दुकानें भी सजाई गई।नन्ने मुन्ने बच्चों ने मेले में मनोरंजन का आनंद लिया। भागवत कथा में रातडिया ,बीजलवास बामनिया, कान्हा खेड़ा आदि क्षेत्र 3 गांव के गणमान्य लोग सहभागी बने, नन्ने मुन्ने बच्चों ने मेले में मनोरंजन का आनंद लिया। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा का विश्राम आज 6 अप्रैल दोपहर पंच कुंडी यज्ञ में पूर्णाहुति के साथ होगा।