जावद। माहे रमजान जहां रब की इबादत करने के लिए एक ऐसा माह है जिसमें रब अपने नुमाइंदों के ऊपर दिल खोलकर खुशियों की बरसात करते हैं, मुस्लिम धर्मावलंबी पूरे माह ईबादत के साथ ही रोजा भी रखते हैं। वहीं मुस्लिम समुदाय सुबह से पहले सेहरी कर दिनभर करीब 14 घण्टे से भी ज्यादा बिना अन्न व पानी के रोजा रख रब की ईबादत में मशरूम है और कोशिश जारी है कि बस रब राजी हो जाये। ऐसे में रमजान के पवित्र माह में जहां छोटे-बड़े बुजुर्ग और मुस्लिम महिलाएं रोजा रखकर खुदा की इबादत कर रहे ऐसे में मासूम बच्चे भी जब उन्हें देखते हैं तो उनसे प्रेरित हो ही जाते हैं। पवित्र रमजान माह में हर कोई रब की इबादत कर रहा ऐसे में बच्चे भी पीछे नहीं हैं इसी कोशिश को अंजाम दिया है जावद नगर के वार्ड क्रं. 05 रुपारेल की रहने वाली एक 7 साल की उम्र की माहेनूर ने। मासूम ने माहे रमजान के शुक्रवार को 15 वें रोजे पर पहला रोजा रखा, सुबह के पहले तय समयानुसार उठ कर सेहरी की और पूरे दिन रोजा रख कर शाम को मगरिब की नमाज के वक्त रोजा इफ्तार किया। इस मौके पर पूरे परिवार ने और सभी अजीजों - अकारीब ने फूल-मालाओं से इस्तकबाल किया और खूब दुआओ से नवाजा।
हालांकि यह उम्र बेहद कम होती किंतु सात वर्षीय माहेनूर पिता आशिक हुसैन रहमानी ने रमज़ान मुबारक के मुकद्दस मौके पर छोटी सी उम्र में पहला रोजा रखा। मासूम बच्चों को दुआएं देने वालों का घर में तांता लगा, मासूम बच्चों के इस जज्बे को देख कर स्थानीय लोगों ने फूल माला पहना कर बधाई दी और मासूम जज्बे को सलाम किया। माहेनूर के पिता आशिक हुसैन रहमानी ने बताया कि बेटी घर के बड़े बुजुर्गों से प्रभावित है। उसने रमजान माह में पहला रोजा रखकर खुदा की इबादत की और देश-दुनिया में अमन और शांति के साथ विश्व कल्याण के लिए अल्लाह से दुआएं मांगी। इस दौरान मासूम माहेनूर द्वारा इतनी कम उम्र में रोज़ा रखने के बाद बच्ची को उसके परिवार और मोहल्ले से खूब दुआएं मिली सभी ने बच्ची की तारीफ और हौसला अफ़ज़ाई की गई हैं।