नीमच। ‘‘गौरव दिवस की बेला में, मैं उनका तराना गाता हूँ... जो नायक हैं आज़ादी के, मैं उनको शीश झुकाता हूँ’’ के स्वर जब कवि धर्मेन्द्र शर्मा ने छेड़े तो 1857 से 1947 तक के स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों के चेहरे मस्तिष्क पटल पर उभर आये। अवसर था नगरपालिका के तीन दिवसीय नीमच गौरव दिवस के दूसरे दिन 1857 की क्रांति का स्मरण करते हुए वात्सल्य भवन पर आयोजित काव्य गोष्ठी का। स्थानीय कवियों ने राष्ट्रीयता से ओत-प्रोत रचनाओं के साथ ही समसामयिक विषयों पर भी भावपूर्ण कविताएँ सुनाई।काव्य गोष्ठी के प्रारंभ में विधायक दिलीपसिंह परिहार, नगरपालिका अध्यक्ष स्वाति गौरव चौपड़ा, मुख्य नपा अधिकारी गरिमा पाटीदार, उपाध्यक्ष रंजना करणसिंह परमाल, सभापति वंदना खंडेलवाल, अग्रवाल समाज के अध्यक्ष सुरेशचन्द्र सिंहल, समाजसेवी सुनील सिंहल, सेन समाज के अध्यक्ष हरिप्रसाद गेहलोत, सैनी समाज के कालूराम सैनी, मोहनलाल सैनी सहित विभिन्न समाज के अध्यक्षों ने माँ सरस्वती की तस्वीर पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित किया। विधायक परिहार व नपाध्यक्ष चौपड़ा ने नीमच गौरव दिवस के अवसर आयोजित कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला।
माँ सरस्वती की वंदना सूत्रधार धर्मेन्द्र शर्मा ने प्रस्तुत की। नवोदित कवि चंद्रशेखर राठौड़ ने मज़हबी एकता के स्वर छेड़ते हुए आज़ादी और शहीदों का गुणगान किया। 1857 की क्रांति और नीमच पर लिखी डॉ. सुरेन्द्र सिंह शक्तावत की पुस्तक के हवाले से कवि राधेश्याम शर्मा ने तात्कालिक अंग्रेज़ी हुकूमत व भारतीय जनजीवन को अपनी रचना में पिरोकर वाहवाही पाई। कन्या भ्रण हत्या की विसंगति को रेखांकित करतीं कविता ‘‘माँ तुम हस्ताक्षर मत करना’’ सुनाकर केके जैन ने श्रोताओं के मन को झकझोर दिया। जैन ने सैन्य जवानों के सम्मान को भी कविता के माध्यम से स्वर दिये। कवियत्री रेणुका व्यास ने पर्यावरण संरक्षण पर प्रेरक संदेश देती कविता प्रस्तुत की। डॉ. महिपाल सिंह चौहान ने ग़ज़ल के माध्यम से सामाजिक तानेबाने को मजबूत करने की मर्मस्पर्शी पहल की। चौहान ने राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत रचना ‘‘घटाटोप अंधियारे में एक दीप जलाने आया हूँ.. कविताओं के शंखनाद से, देश जगाने आया हूँ’’ सुनाकर श्रोताओं की तालियाँ बटोरी। किशोर जेवरिया ने कलम की शक्ति पर वर्तमान परिदृश्य को आगाह करतीं मुखर रचना सुनाई। जेवरिया ने ‘‘ख़त’’ पर भावभरी कविता के माध्यम से गुज़रे जमाने में ख़त की शैली और भावों को अभिव्यक्त किया। बाबूलाल गौड़ ने भी अतीत के हिन्दुस्तान को अपनी कविता के माध्यम से स्वर देकर काव्य गोष्ठी को समापन द्वार तक पहुँचाया। इस अवसर पर सुरेन्द्रसिंह शक्तावत,नपा पार्षद आलोक सोनी, रूपेन्द्र लोक्स, स्वास्थ्य अधिकारी श्याम टांकवाल, कार्यालय अधीक्षक महेश रामानी, कन्हैयालाल शर्मा, राजस्व अधिकारी टेकचन्द बुनकर सहित अनेक नपा अधिकारी, कर्मचारी, गणमान्यजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन विजय बाफना ने किया।
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वॉइस ऑफ़ एमपी की मुहीम- बेज़ुबान पक्षियों के लिए दान करें सकोरे या फिर अपने मकान की छत पर रखे सकोरे, भीषण गर्मी में सुने इनकी फ़रियाद।