मल्हारगढ़। कांग्रेस की राजनीति में आन्दोलनों की भट्टी से तपकर निकले एक खरे सोने का नाम है श्यामलाल जोकचन्द्र। मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के साथ ही संसदीय क्षेत्र में जोकचन्द्र एसा नाम है, जो किसी के परिचय का मोहताज नही है, मगराना गांव के इस किसान नेता की पहचान प्रदेश के साथ ही दिल्ली के कई वरिष्ठ नेताओं के बीच है, इसी कारण इन्हें दो बार मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी ने टिकट भी दिया और इस बार भी पार्टी सर्वे में जोकचन्द्र का नाम प्रमुखता से नम्बर वन पर आया है।
छोटे से कार्यकर्ता के रुप में कांग्रेस की पार्टी से राजनैतिक कैरियर की शुरुआत करने वाले जोकचन्द्र ने कई उतार-चढाव देखे, संघर्ष किया और लगातार आगे बढ़ते गए, अपना वजूद इतना मजबूत कर लिया कि उन्हें अब आमजनता अगला विधायक देखना चाहती है। मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र में जब भी किसी भी वर्ग के साथ अन्याय, अत्याचार हो या कोई फर्जी प्रकरण बनाने का मामला हो, जोकचन्द्र हमेशा पीड़ित पक्ष के साथ खड़े रहकर हर अन्याय, अत्याचार का डटकर मुकाबला करते देखे जा सकते है। जोकचन्द्र क्षेत्र में लगाकर बढ़ते जनाधार के बावजूद अपनी जमीन नही छोड़ते हुए अपने काम का प्रचार किए बिना निष्काम रुप से जनसेवा के मिशन में जुटे हुए है, जोकचन्द्र की सक्रियता के चलते विधानसभा क्षेत्र में हार-जीत का अंतर दूसरी विधानसभा की तुलना में काफी कम रहा था, सक्रियता के चलते क्षेत्र के युवाओं व किसानों में जोकचन्द्र का जुनून बरकरार है। करीब 20 वर्षों से जोकचन्द्र ने किसानों, गरीबों, मजदूरों व हर वर्ग की सेवा के लिए खुद को समर्पित किया है।
मंदसौर जिले के साथ ही मल्हारगढ़ विधानसमा में जब भी किसी को परेशानी महसूस हुई तो उसने जोकचंद को अपने साथ खड़ा पाया। किसान आंदोलन हो या अफीम किसानों की समस्या हर समय किसानों के साथ खड़े रहे व उन्हें अपना हक दिलवाने के लिए सैकड़ों आन्दोलन किए। बाढ़ के समय भी जोकचन्द्र ने गांव-गांव घूमकर प्रभावितों की जो मदद होना चाहिए वह की। किसान आन्दोलन के दौरान कर्फ्यू के बीच मंदसौर जिला चिकित्सालय पहुंचकर शहीद किसानों के परिजन को न्याय दिलाने के लिए मुख्य सचिव, आईजी, डीआईजी, एसपी, कलेक्टर से सामने किसानों की मांग को दमदारी से रखा व आर्थिक सहायता की घोषणा नही हो जाने तक लाशें नही उठने दी, आखिरकार सीएम को शहीद हुए किसानों के परिजनों को एक-एक करोड़ की आर्थिक सहायता व परिवार के एक सदस्य को शासकीय नौकरी देने की घोषणा करना पड़ी। एसे कई आन्दोलनों के अलावा अपनों की मदद के लिए वे प्रशासनिक अधिकारियों से भिडने में भी कोई देरी नही करते है। जोकचन्द्र की सेवा का ही परिणाम था कि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया, जोकचन्द्र के साथ कार्यकर्ता व जनता का जो लम्बा कारवॉं है, वह अन्य किसी के साथ दूर-दूर तक नही है। विपरित परिस्थितियों के बावजूद जोकचन्द्र हमेशा अपना कार्य व जनहित के मुद्दों को लेकर सड़क पर संघर्ष करते देखे जा सकते है, लेकिन कभी उन्होंने अपने कार्य का प्रचार करने का दिखावा नही किया।
जोकचन्द्र बताते है कि मल्हारगढ़ विधानसभा की जनता मेरा परिवार है और परिवार के किसी भी व्यक्ति को कोई भी परेशानी आती है तो मैं तत्काल पहुंचता हूँ। कई बार तो किसी को कोई परेशानी होती है और मुझे पता चलता है तो मैं बगैर सूचना के ही उसके पास पहुंचकर समस्या का निराकरण करवाता हूँ। किसान आन्दोलन में घायल किसानों को सरकार की घोषणा के बाद भी सहायता राशि नही मिली थी, उस दौरान 11 दिन तक अनिश्चितकालीन धरना देकर किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करवाई।
मल्हारगढ़ तहसील के काचरिया, चंद्रावत गांव के एक साधारण किसान परिवार से आने वाले श्यामलाल जोकचंद्र की पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनैतिक रही है और इनके पिताजी, दादाजी भी काँग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता रहे हैं। हालांकि राजनीति में औपचारिक प्रवेश से पहले भी वह अपने सुभाषचंद्र संगठन के माध्यम से शोषित व वंचित वर्ग की लड़ाई लड़ते रहे हैं। संगठन के अंतर्गत उन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए बहुत से आंदोलन, धरना-प्रदर्शन, थाने-तहसील-कलेक्टर-पंचायत आदि का घेराव किया और आश्चर्यजनक रूप से उन्हें हर आंदोलन में सफलता भी मिली। वह अब तक अन्याय-अनाचार के खिलाफ संघर्ष करते हुए लगभग 400-500 आंदोलनों का हिस्सा बन चुके हैं। जोकचन्द्र कांग्रेस संगठन में कई पदों पर कार्य कर चुके है, वहीं प्रदेश के साथ ही अन्य प्रदेश में भी प्रभारी के रुप में कांग्रेस संगठन को और मजबूत करने में दिन-रात लगे हुए है। मल्हारगढ़ विस क्षेत्र में रोजगार के विभिन्न अवसर उत्पन्न करते हुए वह समाज से बेरोजगारी को दूर करने में अहम भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं और युवाओं को नई दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं। छात्र जीवन से ही शोषितों, पीड़ितों, किसानों, मजदूर वर्ग, गरीबों, दलितों इत्यादि अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों की आवाज बनकर संघर्ष कर रहे।
श्यामलाल जोकचंद्र काँग्रेस पार्टी से दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और दोनों बार वह मात्र कुछ वोटों से पीछे रह गए। मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र में श्यामलाल जोकचंद्र की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां से उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे, मसलन मंदसौर किसान आंदोलन 2017 आदि, राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे। राजनीति में श्यामलाल जोकचंद्र का प्रवेश काँग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता के तौर पर हुआ था, जिसके बाद उनकी कुशलता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें युवा काँग्रेस के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया। इसके उपरांत उन्होंने 2005 में जनपद पंचायत के चुनावों में भागीदारी ली और जीत हासिल की। जोकचन्द्र ने अपने विधानसभा क्षेत्र में एक नदी (जो साढ़े तीन किलोमीटर लंबी, 30 फुट गहरी और 150 फुट चौड़ी है) गोद ली व खुदाई स्वयं अपने खर्चे से करवाई, इसका क्षेत्र के किसानों को अभी भी लाभ मिल रहा है। इसके अतिरिक्त क्षेत्र में जब ठेकेदार किसानों के अधिकारों का हनन कर रहे थे, उन्हें कम भुगतान किया जा रहा था, तब उन्होंने प्रशासन की मौजूदगी में डेढ़ महिने तक धरना-प्रदर्शन करते हुए किसानों को डोडाचूरा का 1 करोड़, 70 लाख रुपये का मुआवजा दिलाया।
जोकचन्द्र का कहना है कि आत्मविश्वास के साथ आमजन के हितों के लिए कार्य करते रहे, जनसेवा में जो आनंद है वह और कहीं नही है, राजनीति व्यापार नही सेवा का क्षेत्र है। राजीव गांधी को अपना आदर्श मनाने वाले जोकचन्द्र महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित है। उनका मानना है कि अंतिम विकल्प व हर समस्या का समाधान गांधी विचाराधारा ही है, जो सत्य, अहिन्सा के साथ ही सभी धर्म सम्प्रदाय को साथ लेकर चलती है, जोकचन्द्र का कहना है कि मैं गांधी विचाराधार से ही अंतिम सांस तक मल्हारगढ़ विधानसभा परिवार की सेवा करता रहूँगा।
साइकिल व पद यात्रा से नापा मल्हारगढ विधानसभा को-
काँग्रेस संगठन को मजबूती देने के क्रम में वर्ष 2012 में जोकचन्द्र ने मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक गांव में 45 दिनों तक अपने सहयोगियों के साथ साइकिल यात्रा की थी, यह प्रदेश में पहला उदाहरण था कि किसी नेता ने विधानसभा का भ्रमण साइकिल यात्रा व पदयात्रा के माध्यम से किया था। इस दौरान उन्होंने रात्रि विश्राम भी गांवों में ही किया। पार्टी के प्रति संकल्पित रहते हुए उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर समस्त मंदसौर संसदीय क्षेत्र में पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन के साथ मिलकर भी पैदल यात्राएं की।
महापुरुषों को मानते है आदर्श-
श्यामलाल जोकचंद्र राष्ट्र सेवा के लिए संकल्पित रहे महापुरुषों, महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस, राजीव गांधी आदि को अपना आदर्श मानते हैं और उन्होंने बचपन से संतों-महापुरुषों की जीवनी को आत्मसात किया है। उन्हीं के पदचिन्हों पर चलते हुए श्यामलाल जोकचंद्र आगे बढ़े और गरीब-मजलूमों की आवाज बनना तय किया लेकिन इस दौरान उन्होंने महसूस किया कि यदि आपके पास कोई पद या पावर नहीं है तो आपकी आवाज दबा दी जाती है। प्रशासनिक अधिकारी, शासन वर्ग आमजन की समस्याओं को अनसुना कर देते हैं, इसी के लिए उन्होंने अपने संगठन को मजबूत करते हुए शांतिपूर्ण आंदोलन करने का निर्णय लिया महापुरुषों के अलावा राजनीति क्षेत्र में वे कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कमलनाथ, दिग्विजयसिंह, सुरेश पचौरी, मीनाक्षी नटराजन, अरुण यादव, सज्जन वर्मा, जीतू पटवारी आदि वरिष्ठ नेताओं के करीबी है।
भावी विज़न-
मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के भावी विजन को लेकर जोकचन्द्र कहते है कि इस क्षेत्र को अफीम की खेती के लिए जाना जाता है, लेकिन इससे जुड़ी कई समस्याएं है, जिन पर अब तक जनप्रतिनिधयों ने कोई काम नही किया है। कृषि बहुल इस क्षेत्र में किसानों के सामने पानी की बड़ी किल्लत है, जोकचन्द्र का कहना है कि चम्बल नदी व गांधीसागर गांध के नजदीक होने के बाद भी यहां के किसानों को सिंचाई के लिए उपयुक्त जल नही मिल पाता है, जिसका बड़ा असर फसलों व किसानों के रोजगार पर पड़ता है। इसके अतिरिक्त क्षेत्र में शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है, स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए स्थानीय निवासियों को संघर्ष करना पड़ता है, जो क्षेत्र का पिछड़ापन दर्शाता है, जोकचन्द्र का कहना है कि जनता इस उन्हें आर्शीर्वाद देगी और निश्चित रुप से योजनाबद्ध तरीके से क्षेत्र का विकास करेंगे।