डेस्क। प्रदेश भाजपा कोर कमेटी की बैठक 4 जुलाई को पार्टी दफ्तर भोपाल में संपन्न हुई। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित प्रदेश भाजपा के दिग्गज नेता शामिल हुए। बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा हुई। साथ कई सुझाव भी दिए गए।
बैठक में हारी हुई सीटों पर पूर्णकालिक प्रभारियों के कामकाज का रिव्यू हुआ। इसी दौरान सिंधिया ने कहा कि सभी हारी सीटों पर अभी से टिकट या प्रत्याशी तय कर देने चाहिए। इससे उन्हें काम करने का वक्त मिलेगा। सिंधिया ने जब यह बात कही तो वहां मौजूद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा समेत किसी भी नेता ने जवाब नहीं दिया। एक नेता ने जरूर कहा कि सिंधिया भाजपा में नए हैं।
सूत्रों की मानें तो सिंधिया को चिंता है कि एमपी में उपचुनाव के बाद अभी भी 103 सीटें ऐसी हैं, जो पकड़ से बाहर हैं। इसी बात को लेकर बैठक में उन्होंने अपनी बात रखी, लेकिन किसी भी नेता ने उनकी इस बात पर ध्यान नहीं दिया। जैसे ही यह बात राजनीतिक चाणक्यों तक पहुंची तो उन्होंने कहा कि जिस सिंधिया की पकड़ कांग्रेस में इतनी मजबूत होती थी कि हर फैसला उनसे पूछकर लिया जाता था। चुनाव के वक्त टिकिट वितरण में उनकी राय को प्राथमिकता दी जाती थी, उन्हीं सिंधिया की आज भाजपा में चिंता की किसी को परवाह नहीं। सिंधिया की बात का जवाब देना भी किसी ने उचित नहीं समझा।
मालवा क्षेत्र के मंदसौर संसदीय क्षेत्र में भी सिंधिया के सिपहसालार विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी को लेकर तैयारी कर रहे हैं। जावद से समंदर पटेल, मनासा से विज्जु बना, गरोठ से मुकेश काला और जावरा से केके सिंह लगातार उम्मीदवारी के लिए दमखम लगा रहे हैं। लेकिन जब भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में सिंधिया को ही अनसुना कर दिया गया तो फिर कैसे सिंधिया अपने समर्थकों के लिए टिकिट की पैरवी करेंगे। वहीं अन्दरखानों की खबरें तो यह भी बता रही है कि मंदसौर संसदीय क्षेत्र के ये सिंधिया समर्थक टिकिट के चक्कर में कांग्रेस के संपर्क में भी है। अब देखना यह है कि सिंधिया और सिंधिया समर्थक इस राजनीतिक पसोपेश में क्या करते हैं।