नीमच। बड़ी चूक कर गए सभापति मनोहर मोटवानी कल। कांग्रेसियों ने इस मौके को लपक लिया और सुनहरे अवसर में तब्दील कर दिया। बात दरअसल है तो कल बोहरा बाजार में हुए धरने प्रदर्शन की। लेकिन सामान्य सी दिख रही इस घटना के कई बड़े राजनीतिक निहितार्थ है। जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने सोचा कि ऐसे धरने प्रदर्शन तो रोजमर्रा की बात है। यहीं गलती हो गई और सारे संदेश विपरीत चले गए।
बोहरा बाजार में जनता की जायज मांग के बुलावे पर नगरपालिका के सभापति मनोहर मोटवानी शहर में होने के बावजूद धरना स्थल पर नहीं पहुंचे और लोगों में यह संदेश चला गया कि भाजपा के प्रतिनिधि विकास के मुद्दों पर अपने वादे और दावे के अनुरूप काम न कर पाने के कारण जनता का सामना नहीं कर पा रहे हैं। वहीं कांग्रेस के तमाम बड़े नेता बौहरा बाजार में इकट्ठा होकर जनता के सुर में सुर मिला कर यह पैगाम देने में कामयाब रहे कि वे जनहित के मुद्दों के लिए जन आंदोलन करने सड़कों पर उतर सकते है। राजनीति में एक छोटी भूल भी भावी परिणामों पर गंभीर असर डाल सकती है, यह भूल कल मनोहर मोटवानी कर गए। यदि समय पर पहुंच जाते, तो मामला तुरंत शांत हो जाता। इसका पछतावा उन्हें और भाजपा को निश्चित रूप से आने वाले समय में होगा। इस घटना से एक जनसेवक होने का ढिंढोरा पीटने वाले मोटवानी की छवि को भी खामियाजा होगा।
नीमच की अवाम में बारिश के बाद शहर में जगह-जगह जलभराव, जलकुंभी, नालों की हालत, निचली बस्तियों में परेशान लोग, कई कॉलोनियों की जर्जर स्थिति, बघाना का अंडर ब्रिज और ओवर ब्रिज, ग्वालटोली पुलिया का रुका पड़ा निर्माण कार्य, जमीन और भ्रष्टाचार को लेकर उठती आवाजें, चरमराई हुई सफाई व्यवस्था अतिक्रमण, आए दिन सड़क निर्माण की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शन, जाजू सागर बांध की भूमि पर अवैध खेती और पानी चोरी आदि अनेक मुद्दों पर जो तीखा आक्रोश है। उसकी एक बानगी बौहरा बाजार में प्रदर्शन के दौरान लगे बैनर में दिखी जिसमें नगर पालिका को नरक पालिका लिख दिया गया।
सत्तारूढ़ राजनीतिक नेतृत्व को इन बातों से जनमानस को समझना होगा। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विकास कार्य करवाने वाली बात भी थोथी सिद्ध हो गई। बोहरा बाजार में किए जा रहे आंदोलन के बीच सीएमओ महेंद्र वशिष्ट की कांग्रेस के युवा नेता और और पार्षद प्रतिनिधि मोनू लॉक्स के साथ हुई झड़प ने आग में घी का काम किया। इस घटना से लोगों के दिलों दिमाग में यह बात गहरे तक पैठ कर गई है कि अफसरों ने जनप्रतिनिधियों को सुनना बंद कर दिया है। जनता के नुमाइंदों को तवज्जो नहीं दी जा रही है। व्यापारी वर्ग में भाजपा के प्रति नाराजगी भी कुछ और दर्शा रही है। नीमच की जनता के बीच में कल भाजपा के जनप्रतिनिधियों से हुई चूक के संदेश और विकास को लेकर जनमानस की सोच को पार्टी जितनी जल्दी समझ पाए, उतना बेहतर होगा। फिलहाल तो भाजपा बैकफुट पर नजर आ रही है, तुरंत डैमेज कंट्रोल की आवश्यकता है। हां यह भी देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस कब तक इसी प्रकार फ्रंट फुट पर खेल पाएगी।