मनासा। 2 दिन पूर्व कोर्ट एरिया में संयोगवश पूर्व मंत्री कांग्रेस सरकार मध्य प्रदेश नरेंद्र नाहटा का आना हुआ और जैसे ही उन्होंने हमें देखा तो सहजता के साथ उतर कर हमारे पास आकर बैठ गए।
चूँकि सभी को ज्ञात है कि वर्ष के अंत में विधानसभा का चुनाव है इसी को लेकर दावेदारी करने वाले सभी नेताओं के दौरे और सक्रियता चरम पर है। नरेंद्र नाहटा से, जब दावेदारी के विषय में चर्चा हुई तो उन्होंने बेबाक तरीके से अपनी बात रखी कि संगठन जिसे अवसर देगा हम उसके साथ हैं। जब उनसे पूछा गया कि मनासा में बाहरी का विरोध है तो उनका कहना था कि मंदसौर वालों का कहना है कि आपका मंदसौर में क्या काम है और मनासा वालों का कहना है कि मैं बाहरी हूँ। मैं पिछले 25 से 30 सालों से मनासा विधानसभा के लोगों से जुड़ा हुआ भी हूं, इसलिए पूरी विधानसभा के हर गांव में लोग मुझे भली-भांति जानते हैं।
दावेदारी की बात की जाए तो मनासा विधानसभा से मुख्य रूप से नरेंद्र नाहटा, मंगेश संघई, इंदरमल पामेचा का नाम प्रमुखता से कांग्रेस से आ रहा है। परन्तु जिस प्रकार से पिछली बार बाहरी का विरोध कांग्रेस के अंदर हुआ था और इसका सीधा फायदा वर्तमान विधायक माधव मारू को मिला। इस बार भी यही विरोध कांग्रेस के अंदर दिखाई दे रहा जिसके कारण नाहटा के लिए यह राह आसान नहीं दिख रही है। परंतु वह जिस प्रकार से नाहटा विश्वास से लबरेज है तो किसी ओर का नम्बर मुश्किल लग रहा है। उनके अनुभव व सक्रियता के सामने सभी बोने साबित होंगे।
कांग्रेस पार्टी अपने पूरे दमखम के साथ मैदान में उतर चुकी है और ऐसी ही एकजुटता रही तो भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती है। कांग्रेस कमलनाथ के चेहरे के साथ मध्य प्रदेश में चुनाव लड़ने को तैयार है और पूरी उम्मीद बनाए बैठी है कि इस बार भी पिछली बार की तरह ही जनता उन्हें अपना आशीर्वाद देगी। पर यह तो भविष्य के गर्भ में है कि ऊंट किस करवट बैठेगा। परंतु इस वर्ष चुनाव को लेकर रोमांच वर्ष के अंत तक बना रहेगा।