नीमच। मन की भावना पवित्र हुए बिना आत्म का कल्याण नहीं हो सकता है। यदि दान देने की भावना पवित्र हो तो उसका फल अवश्य मिलता है। व्यक्ति दान देने में समर्थ है या नहीं यह अलग बात है लेकिन उसकी भावना अगर पवित्र है तो वह दान सफल होता है।पवित्र भाव हो तो मनुष्य जीवन में मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।
यह बात जैन दिवाकरीय श्रमण संघीय, पूज्य प्रवर्तक, आगम मनस्वी साहित्य भूषण कविरत्न श्री विजयमुनिजी म. सा. ने कही। वे श्री वर्धमान जैन स्थानकवासी श्रावक संघ के तत्वावधान में गांधी वाटिका के सामने जैन दिवाकर भवन में आयोजित चातुर्मास धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि साधु संतों के रूप वैभव को नहीं देखना चाहिए उनके गुण और संस्कार त्याग तपस्या को देखकर जीवन में प्रेरणा लेनी चाहिए क्योंकि आत्म कल्याण के लिए त्याग तपस्या ही महत्वपूर्ण होती है रूप और सौंदर्य नहीं।साध्वी डॉ विजय सुमन श्री जी महाराज साहब ने कहा कि अच्छे कर्मों का फल भी अच्छा ही मिलता है दूसरों के लिए यदि हम बुरा करेंगे तो हमारा भी बुरा होगा ही होगा।हम दूसरों का भला करेंगे तो परमात्मा हमारा भला भी करेंगे।चतुर्विद संघ की उपस्थिति में चतुर्मास काल तपस्या साधना निरंतर प्रवाहित हो रही है। इस अवसर पर प्रभा पितलिया व रविंद्र पप्पू बम के उपवास की तपस्या पूर्ण होने पर सभी ने सामूहिक अनुमोदना की।धर्म सभा में उपप्रवर्तक श्री चन्द्रेशमुनिजी म. सा.एवं साध्वी विजय श्री जी म. सा. का सानिध्य मिला।इस अवसर पर श्री अभिजीतमुनिजी म. सा., श्री अरिहंतमुनिजी म. सा., ठाणा 4 व अरिहंत आराधिका तपस्विनी श्री विजया श्रीजी म. सा. आदि ठाणा का सानिध्य मिला। चातुर्मासिक मंगल धर्मसभा में सैकड़ों समाज जनों ने बड़ी संख्या में उत्साह के साथ भाग लिया। इस अवसर पर श्री संघ अध्यक्ष अजीत कुमार बम्म, चातुर्मास समिति संयोजक बलवंत सिंह मेहता, सागरमल सहलोत, मनोहर शम्भु बम्म, सुनील लाला बम्ब, निर्मल पितलिया, सुरेंद्र बम्म, वर्धमान स्थानकवासी नवयुवक मंडल अध्यक्ष संजय डांगी दिवाकर महिला मंडल अध्यक्ष रानी राणा ,साधना बहू मंडल अध्यक्ष चंदना जैन आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे। इंदौर रतलाम, जावद जीरन, चित्तौड़गढ़, छोटी सादड़ी निंबाहेड़ा जावरा नारायणगढ़, उदयपुर आदि क्षेत्र से समाज जन सहभागी बने और संत दर्शन कर आशीर्वाद ग्रहण किया। धर्म सभा का संचालन प्रवक्ता भंवरलाल देशलहरा ने किया।