जावद। जावद में त्योहारों के दौरान पिछले करीब 11 वर्षों से बाजार बंद रहने की कथित अघोषित परंपरा को लेकर समाजसेवी एवं पूर्व पार्षद हारून रशीद कुरैशी ने चिंता जताई है। उन्होंने प्रशासन और राजनीतिक दलों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इस स्थिति का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
गंगा-जमुनी तहजीब की पहचान रहा है जावद
कुरैशी ने कहा कि जावद लंबे समय से आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब के लिए जाना जाता है। ऐसे में किसी भी त्योहार के अवसर पर बाजारों में भय, असमंजस या सन्नाटे की स्थिति नगर के सामाजिक वातावरण के लिए उचित नहीं है।
11 साल में कई अधिकारी बदले, समस्या बरकरार
उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में कई कलेक्टर, एसपी और स्थानीय अधिकारी बदले, लेकिन बाजार बंद रहने की कथित स्थिति का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। उन्होंने शांति समिति की बैठकों की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बैठकों के बाद भी यदि जमीनी स्थिति नहीं बदलती तो इस पर गंभीरता से विचार जरूरी है।
राजनीतिक दलों से भी स्पष्ट भूमिका की मांग
हारून रशीद कुरैशी ने राजनीतिक दलों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर आगे आकर समाधान की पहल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सामाजिक सौहार्द केवल चुनावी मंचों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
सामान्य रूप से खुलें बाजार
कुरैशी ने जिला प्रशासन, पुलिस, व्यापारिक संगठनों और सभी समाजों के प्रतिनिधियों से संवाद कर आगामी त्योहारों पर बाजार सामान्य रूप से संचालित कराने और व्यापारिक गतिविधियां निर्बाध रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर नागरिक बिना भय या संकोच के अपने त्योहार मना सके, इसके लिए निष्पक्ष और स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।