BREAKING NEWS
बापचा से निकली भव्य कांवड़ यात्रा, देहरी घाट.. <<     **बिजली पोल पर चढ़ा कर्मचारी, फिर नीचे गिरी.. <<     KHABAR : 20-25 साल से हक के लिए भटक रहा ग्रामीण,.. <<     संगठन में नई नियुक्तियां, लाल सिंह आर्य.. <<     KHABAR : बागेश्वर धाम में भंडारे की लाइन में खड़ा था.. <<     KHABAR : उज्जैन में आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब, 24.. <<     KHABAR : नाला बंद, रास्ता जलमग्न, पैदल से लेकर.. <<     MP में फिर बरसेगा आसमान, बदला मौसम का.. <<     KHABAR : आदेश हुआ, लेकिन रास्ता नहीं खुला, प्रशासन.. <<     बेहरावल में निकली भव्य कांवड़ यात्रा,.. <<     BIG VIDEO : गायों को बचाने में मचा मौत का तांडव! भिंड.. <<     सेंधवा में श्रद्धा और उत्साह से मनाया गया.. <<     नाग पंचमी पर नागलवाड़ी शिखर धाम में उमड़ा.. <<     KHABAR : अर्जुन विजयवर्गीय को मिली नारायण सेवा.. <<     VIDEO: बरगी बांध के 9 गेट खुले, नर्मदा उफान पर! 1031.. <<     NEWS : स्वतंत्रता दिवस पर निशुल्क सेवा का कई.. <<     BIG NEWS : बिजली कर्मचारी की मौत पर बवाल, आक्रोशित.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
July 22, 2023, 5:46 pm
KHABAR : नर्मदा का जल पीने लायक नहीं पानी से कैंसर का खतरा, मेधा पाटकर बोलीं-नाइट्रेट की मात्रा 46 मिग्रा तक, नाइट्रेट की मात्रा बढ़ने से ये नाइट्राइट में परिवर्तित, पढे़ खबर 

Share On:-

बड़वानी। नर्मदा का जल पीने लायक नहीं पानी से कैंसर का खतरा मेधा पाटकर बोलीं-नाइट्रेट की मात्रा 46 मिग्रा तक पहुची। यह बात धार जिले के ग्राम बोधवाडा और कुकरा-राजघाट के पानी के सैंपल की जांच रिपोर्ट में सामने आई है। नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रमुख मेधा पाटकर ने कहा कि नर्मदा का पानी पीने के लिए तब तक लायक नहीं होगा, जब तक उसका पूर्ण शुद्धिकरण नहीं किया जाता।  नर्मदा के पानी में विविध जीवजंतु (पैथोजेन्स) होते हैं। उनमें फिकल (मलमूत्रधारित) कोलीफॉर्म और उसमें भी सबसे अधिक खतरनाक ई-कोलीफॉर्म होते हैं, जो नर्मदा के पानी में पाए गए हैं। इनसे जल से होने वाली कई बीमारियां होती हैं।


मेधा पाटकर ने कहा कि दोनों स्थानों के पानी की जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि पानी में नाइट्रेट की मात्रा 45 मिग्रा प्रति लीटर से बढ़कर 46 तक पहुंच चुकी है। जबकि ये 10 से 45 मिलीग्राम के बीच में होनी चाहिए। नाइट्रेट की मात्रा बढ़ने से ये नाइट्राइट में परिवर्तित होता है। इसके परिवर्तन का मुख्य स्त्रोत मनुष्य और पशुओं का मलमूत्र होता है। इससे कैंसर तक की बीमारी होने की अशंका होती है। हालांकि, 2022 में सरदार सरोवर जलाशय के पानी का भी परीक्षण हुआ था। उसकी रिपोर्ट भी ऐसी ही थी। इस बार धार जिले में ऐसी रिपोर्ट आने से खतरा और बढ़ गया है।


नर्मदा के पानी में आयरन यानी लोहे की मात्रा भी सीमा पार कर रही है। इससे भी डायबिटीज से लेकर चमड़ी, यकृत और हृदय पर असर की आशंका बढ़ जाती है।  सिलिका यानी रेत भी इस पानी में होती है, नदी किनारे चल रहा अवैध रेत खनन के कारण रेत भी कम हो रही है। रेत के कम होने से पानी पीने की इच्छा कम हो जाती है। जिससे शरीर का निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) की बीमारी संभव है। इसी तरह इसकी कमी से सांस और फेफड़े संबंधित बीमारी भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि जबलपुर से बड़वानी तक के शहरों से रोज लाखों लिटर गंदा पानी, शहर का ड्रेनेज, मवेशियों का मलमूत्र नर्मदा नदी में बहता है। इसे शुद्धिकरण प्लांट से निकलकर ही नदी तक पहुंचने देना चाहिए। खेतों से बहने वाले कृत्रिम, अजैविक खाद, कीटनाशक भी कुछ हद तक इसके जिम्मेदार है। पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र से निकालकर नदी में फेंके जाने वाले अवशिष्ट पदार्थ भी नर्मदा को नुकसान पहुंचाते है।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE