डेस्क। प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर मुख्य राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस पूरी तरह से तैयार हैं। विधानसभा उम्मीदवारों के नामों को लेकर दोनों ही दलों में लगातार बैठकों और मंथन का दौर जारी है। जहां भाजपा ने कांग्रेस से एक कदम आगे बढ़ाते हुए प्रदेश में 39 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। वहीं कांग्रेस जो कह रही थी की कर्नाटक मॉडल के अनुसार उम्मीदवारों के नामों का ऐलान चुनाव से 6 महीने पहले कर देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भाजपा बाजी मारते हुए आगे निकल गई।
भाजपा विधानसभा चुनावी तैयारियों में भी कांग्रेस से आगे हैं। जहां भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश के भाजपा विधायकों को एमपी की 230 विधानसभा की जवाबदारी दी हैं। ये विधायक भाजपा की संगठनात्मक बैठकों सहित वकील, व्यापारी और सामाजिक क्षेत्रों में पकड़ रखने वाले लोगों से भी चर्चा कर रहे हैं। साथ ही भाजपा के संभावित दावेदारों के बारें में भी रायशुमारी कर रहे हैं। कांग्रेस अभी जिला प्रभारियों और सर्वे के सहारे ही हैं। कांग्रेस को अगर सत्ता में वापसी करनी हैं तो मजबूती के साथ कड़े फैसले लेने होंगे। साथ ही कांग्रेस में व्याप्त सबसे बड़ी बीमारी गुटबाजी का भी पक्का इलाज करना होगा। तभी भाजपा पर विजय मिल सकती हैं।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस प्रदेश में 15 सितम्बर से पहले 103 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती हैं। मप्र के कांग्रेस प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन भंवर जितेंद्र सिंह ने प्रदेश के 63 जिला प्रभारियों और जिलाध्यक्षों से प्रत्येक विधानसभा से दावेदारों के नाम बंद लिफाफे में मांगे हैं। साथ ही कमलनाथ से भी 230 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम मांगे हैं। क्योंकि कमलनाथ चुनाव समिति के अध्यक्ष भी हैं। प्रदेश कार्यालय बैठक में स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन और प्रदेश प्रभारी प्रत्येक सीट से एक और दो नाम तय कर स्क्रीनिंग कमेटी में रखे जाएंगे। इनमें से सिंगल नाम तय कर दिल्ली भेजेंगे और अंतिम सूची संभवतः 15 सितम्बर तक जारी कर दी जाएगी।
वहीं दावेदारी के लिए एआईसीसी और पीसीसी द्वारा कराया गया सर्वे भी बड़ा अहम रोल निभाएगा। एआईसीसी ने प्रदेश में 2 और पीसीसी ने प्रदेश में एक सर्वे कराया हैं। 103 विधानसभा सीटों में लगातार हार रही 66 सीटों को भी शामिल किया गया हैं। इन सीटों पर जल्द घोषणा होने से उम्मीदवारों को लम्बा समय भी मिल जाएगा। अधिक समय होने से प्रत्याशी पूरी विधानसभा में प्रचार के लिए जा सकता हैं।
खेर अब देखना हैं कि सूची जारी होने के बाद कांग्रेस बाकी उन उम्मीदवारों को कैसे साधेगी जिन्हे टिकिट नहीं मिलेगा। क्योंकि कांग्रेस में नेता जल्द हावी हो जाता हैं और संगठन पीछे रह जाता हैं। वैसे बीजेपी में भी घोषित 39 सीटों में से कई सीटों पर असंतोष सामने आ रहा हैं।