मंदसौर। आत्महत्या को ना और जीवन को हां कहिए विषय पर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मंदसौर में संगोष्ठी आयोजित की गई संगोष्ठी में प्रो. डॉ. अशोक अग्रवाल ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि तनाव ,चिंता, दुख अस्थाई है -अपनी ऐसी स्थाई भावनाओं के लिए कोई भी स्थाई निर्णय न लें । जीवन में कोई भी परेशानी है उसे पर चर्चा करनी चाहिए । चर्चा करने से समस्या का हल जरूर निकलेगा । आत्महत्या कभी भी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता । डा. मितासी शर्मा मानसिक रोग चिकित्सक ने संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मानसिक समस्या होने पर उसे छुपाए नहीं ,समस्या होने पर बताएं क्योंकि बात करने से ही बात बनेगी । मानसिक और भावनात्मक समस्या होने पर टेली मानस हेल्पलाइन नंबर14416 या 1800-891-4416 पर कॉल करके 24 घंटा निरूशुल्क परामर्श प्राप्त कर सकते हैं । डॉ एम.एल. कश्यप जिला मीडिया अधिकारी मंदसौर ने संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ी समस्या के रूप में उभर रही है । विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में हर साल 8 लाख से अधिक लोग आत्महत्या कर लेते हैं । जबकि इससे कहीं अधिक लोग आत्महत्या करने का प्रयास करते हैं । हर आत्महत्या एक दुर्घटना होती है । जिससे परिवार, समाज और देश पर विपरीत प्रभाव पड़ता है । ऋषिकेश्वर त्रिवेदी परामर्शदाता ने बताया कि शराब और ड्रग्स के सेवन से बचे, एक कुशल जिंदगी के लिए । यदि आत्महत्या का विचार बार-बार आना एवं आत्महत्या से संबंधित आचरण करना ,क्रोध ,भय, चिंता अपराध बोध या उदासी या खुशी की लगातार अनुभूति ,सामाजिक मेल- जोल में परिवर्तन और व्यावसायिक कार्य में समस्याएं , तो बिना देरी के जिला चिकित्सालय स्थित मनकक्ष में चिकित्सक से परामर्श लें और कुशल जीवन जिए । डॉ आर के द्विवेदी जिला क्षय नियंत्रण अधिकारी संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कोई भी बीमारी को छुपाए नहीं ,चिकित्सक से समय पर परामर्श प्राप्त करें -जैसे टीबी की बीमारी को लोग छुपाते हैं ,बताते नहीं, बताने पर टीबी का संपूर्ण इलाज है ,यदि व्यक्ति को 5 दिन से अधिक खांसी आ रही है, बुखार या अन्य बीमारी में कमजोरी थकान हो रही है तो टीबी की जांच करवाये । टीबी की निरूशुल्क जांच एवं दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं । ₹500 प्रति माह अच्छी डाइट के लिए दिए जाते हैं । बार-बार बीमार होने पर व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार पड़ सकता है । इसलिए चिकित्सक , स्वास्थ्य कार्यकर्ता , आशा कार्यकर्ता या नजदीकी स्वास्थ्य संस्था से परामर्श प्राप्त करें । संगोष्ठी में डॉ आर डी गुप्ता , डॉ के आर सूर्यवंशी , प्रो. योगेश पटेल प्रो .अनिल कुमार आर्य ,डॉ गोरा मुवेल , समस्त महाविद्यालय के अधिकारी, एनएसएस स्वयंसेवक व विद्यार्थी उपस्थित रहे ।