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September 10, 2023, 11:03 am
KHABAR : राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा कार्यक्रम के अंतर्गत नेत्रदान के लिए किया प्रेरित, सिविल सर्जन डॉ. सागर ने कहा- जीते जी रक्तदान करें, मरने के बाद नेत्रदान करें, पढ़े खबर 

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रतलाम। जिला चिकित्सालय रतलाम के नर्सिंग कॉलेज परिसर सभाकक्ष में नेत्रदान पखवाड़े का समापन कार्यक्रम आयोजित किया गया । कार्यक्रम के दौरान रोगी कल्याण समिति सदस्य गोविंद काकानी ने कहा कि नेत्रदान करके नेत्रहीन लोगों को दृष्टि प्रदान की जा सकती है । उन्होंने बताया कि उनके स्वयं के परिवार में पांच लोगों ने नेत्रदान किया है, जिससे 10 से अधिक लोगों को नेत्र ज्योति मिल सकी है।सिविल सर्जन एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एम एस सागर ने बताया कि कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए नेत्रदान ही एकमात्र विकल्प है।  सामान्य रूप से आंखों में किसी प्रकार की चोट लगने,  आंखों में एसिड चला जाने आदि कारणों से नेत्र की रोशनी चली जाती है, कॉर्निया ट्रांसप्लांट करके नेत्र ज्योति वापस लाई जा सकती है, इसके लिए नेत्रदान करने व्यक्ति को नेत्रदान संबंधित सहमति पत्र जमा कराना आवश्यक है। व्यक्ति की मृत्यु होने के उपरांत 6 घंटे तक की अवधि में नेत्र का कॉर्निया प्राप्त किया जा सकता है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एस.एस. गुप्ता ने बताया कि मोतियाबिंद, ग्लूकोमा,  कॉर्निया ब्लाइंडनेस के प्रमुख कारण है। अंधत्व के लिए कॉर्निया ट्रांसप्लांट महत्वपूर्ण उपचार है । भारत में लगभग 21 लाख लोग कॉर्निया के कारण से अंधत्व से पीड़ित है और लगभग 22 से 25 हजार लोग ही प्रतिवर्ष नेत्रदान करते हैं। एक व्यक्ति के नेत्रदान करने से दो से तीन लोगों को नेत्र ज्योति मिल सकती है।  इसलिए व्यक्ति को नेत्रदान अवश्य करना चाहिए।कार्यक्रम के दौरान नर्सिंग कॉलेज के विद्यार्थियों को काकानी सोशल वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आकर्षक उपहार भी प्रदान किए गए। कार्यक्रम के दौरान आरएमओ डॉक्टर प्रणव मोदी, अस्पताल प्रबंधक श्रीवास्तव, समाजसेवी हेमंत मूणत, नेत्र चिकित्सा सहायक एम.एल. शर्मा, कीर्ति श्रीवास्तव, सिस्टर ट्यूटर एवं नर्सिंग मेट्रन के अतिरिक्त अन्य विभागीय अधिकारी, कर्मचारी आदि उपस्थित रहे।  संचालन नर्सिंग सिस्टर ट्यूटर कीर्ति परिहार ने किया । कार्यक्रम के अंत में आभार दुष्यंत पुरोहित ने माना।

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