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September 11, 2023, 7:36 pm
REPORT : जेल में आत्महत्या निषेध दिवस के उपलक्ष्य में कैदियों के साथ लोग किन परिस्थितियों में आत्महत्या करते हैं विषय पर विस्तार से की चर्चा, पढ़े खबर 

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झाबुआ। झाबुआ जिला जेल में आत्महत्या निषेध दिवस के उपलक्ष्य में जिला नोडल अधिकारी जगदीश सिसोदिया, मास्टर ट्रेनर स्नेह गीते, कमला पलिया एवं नाथूलाल मुनिया ने कैदियों के साथ आत्महत्या किन परिस्थितियों में लोग करते हैं विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। जिंदगी में निराशा कैसे आ जाती है, मन में कौन-कौन से विकार आ जाने से हम निराश हो जाते हैं।

जिंदा रहना और जीना के अंतर को स्पष्ट किया गया। अल्पविराम का कार्यक्रम रखा गया। जिला जेल अधीक्षक विश्वकर्मा भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। सिसोदिया ने अवगत कराया कि जिन परिस्थितियों में हम लोग जी रहे हैं, उसमें तनाव घुटन बढ़ गई है, लोग संबंध पूर्वक जीना भूल गए हैं। यही मूल कारण है कि वह तनाव में आकर आत्महत्या कर लेते हैं। देखा गया है कि, ज्यादा धन दौलत संग्रहण करने वाले लोग ज्यादा आत्महत्या कर रहे हैं। वर्तमान में संबंध पूर्वक जीने में सबसे बड़ी बाधा सुविधाओं को ज्यादा महत्व देने से आ रही है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए, शरीर को सुंदर दिखाने के लिए, काफी सारे प्रयास किया जा रहे हैं। लेकिन मानसिक स्वच्छता पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मानवीय मूल्य की चर्चा करते हुए सिसोदिया ने बताया कि हमारे अंदर जो स्थापित मूल्य है। आधार मूल्य विश्वास से लेकर पूर्ण मूल्य प्रेम तक विस्तार से चर्चा की गई।

मास्टर ट्रेनर स्नेहा गीते ने एक सामान्य से पेन के वजन को हम कितनी देर सहन कर सकते हैं। फिर हमारे मस्तिष्क में इतने सारा बोझ उठाकर क्यों चलाते हैं? उदाहरण के माध्यम से तनाव मुक्त रहने पर जोर दिया गया। कमला पलिया ने मानव के मूल्यों को एक कहानी के माध्यम से समझाया। हमें वस्तुओं के मूल्य तो पता है, लेकिन मानव के मूल्य पता नहीं है। मुनिया ने ईश्वर की कृपा पर एक अच्छी कहानी सुनाई और बताया कि जो सहज सरल व्यक्ति होते हैं, उनका ईश्वर भी ध्यान रखना है। सहजता, सरलता से जीना अगर आ गया उससे बड़ी कोई उपलब्धि नहीं हो सकती। अंत में जेल अधीक्षक विश्वकर्मा ने बताया कि हमें सारे नियमों का पालन करते हुए व्यवस्थित रूप से जीना होगा, तभी तनाव मुक्त रह पाएंगे।

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