खरगोन। घर का पानी घर व खेत का पानी खेत में संरक्षित करने की मुहिम जैसे ही जिले में पहाड़ी का पानी पहाड़ी पर ही रोकने की दिशा में बड़ा काम हुआ है। खरगोन जिले में सतवाडा व लिक्खी गांव के बरखेड़ा की पहाड़ी का पानी पहाड़ी पर ही सहेज लिया है। दोनों जगह 5.50 हेक्टेयर में लगभग 2500 कंटूर बनाए गए। हाल की जोरदार बारिश में कंटूर में से पानी रिसकर पहाड़ियों को तृप्त करते हुए अमृत सरोवर व वाटरशेड तक पहुंचा। चार अमृत सरोवर व वाटरशेड जलाशय लबालब भर गए हैं। इनमें 7 करोड़ 63 लाख लीटर जल संग्रहण हुआ है। वॉटरशेड परियोजना अधिकारी रमाकांत पाटीदार ने बताया कि खरगोन जनपद में वॉटरशेड मिशन और मनरेगा में सतवाड़ा-कमोदवाड़ा-साइखेड़ी-चन्दावड व लिक्खी गांव की बरखेड़ा पहाड़ी के लिए जल संरक्षण की कार्ययोजना बनाई गई। इसमें कंटूर में पानी रोकने के साथ अमृत सरोवर व तालाबों के माध्यम से पहाड़ी पर ही पानी रोकने का नवाचार किया। हाल की बारिश से सतावड व बोरखेड़ा की पहाड़ी के कंटूर, अमृत सरोवर व सिंचाई विभाग के जलाशय भर गए है। पहाड़ी पर जल उपचार के प्रयास सफल हुए। सतवाड़ा-कमोदवाड़ा-साईंखेड़ा-चन्दावड की पूरी पहाड़ी लगभग 5 किमी में फैली है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में चयन किया गया। यहां वॉटरशेड ने 4 नए 20 घन मीटर से अधिक क्षमता वाले अमृत सरोवर के रूप में वॉटर टैंक व मनरेगा में एक अमृत सरोवर बनाया। सालभर पहले एक अमृत सरोवर बनाया था।
जानिए, ऐसी है दो पहाड़ियों पर जल उपचार प्रणाली सतावड-
4 अमृत सरोवर लबालब -
पहाड़ी पर वॉटरशेड के 26 हजार, 22 हजार, 13 हजार व 12400 घन मीटर क्षमता के 4 अमृत सरोवर। ढाई हेक्टेयर में 3 -3 मीटर लंबाई, चौड़ाई व 0.6 मीटर गहराई के 1000 कंटूर। इससे तलहटी में 4 अमृत सरोवर व जलाशय जिंदा हुए।
बोरखेड़ा - 3 हेक्टेयर में बनाए 1250 कंटूर
लिक्खी गांव की बरखेड़ा पहाड़ी पर 3 हेक्टेयर में 1250 कन्टूर बनाए गए। इसमें वर्षा जल संग्रहित हुआ। यहां से रिसकर पहाड़ी की तलहटी में बने अमृत सरोवर वाटरशेड तक पानी पहुंचा है।