उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और जाम की समस्या को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। महाकाल मंदिर पहुंचने वाले प्रमुख मार्गों पर ऑटो रिक्शा और ई-रिक्शा के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
यह प्रतिबंध हरिफाटक ब्रिज से महाकाल चौराहा (बेगमबाग, नीलकंठ द्वार), लोहे के पुल से महाकाल चौराहा, गुदरी से महाकाल चौराहा और चारधाम मंदिर से हरसिद्धि चौराहा तक लागू किया गया है। लंबे समय से महाकाल मंदिर जाने वाले इन प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक जाम एक बड़ी समस्या बना हुआ था।
बेगमबाग, महाकाल घाटी, गुदरी चौराहा, नीलकंठ द्वार और हरसिद्धि क्षेत्र में अक्सर ऐसी स्थिति बन जाती थी कि दोपहिया वाहन चालकों को भी निकलने में कठिनाई होती थी। चार पहिया वाहन यदि इन मार्गों में फंस जाते थे, तो उन्हें बाहर निकलने में एक से दो घंटे तक का समय लग जाता था।
इस समस्या का प्रभाव केवल महाकाल क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि गोपाल मंदिर, दौलतगंज, कंठाल और हरिफाटक ओवरब्रिज तक यातायात व्यवस्था प्रभावित होती थी। समस्या की गंभीरता को देखते हुए सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में विस्तृत चर्चा की गई।
समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि संकरी सड़कों पर बड़ी संख्या में संचालित हो रहे ऑटो और ई-रिक्शा ट्रैफिक जाम के प्रमुख कारणों में से एक हैं। इसके बाद प्रशासन ने हरिफाटक ब्रिज से महाकाल चौराहा (बेगमबाग-नीलकंठ द्वार मार्ग), लोहे के पुल से महाकाल चौराहा, गुदरी से महाकाल चौराहा तथा चारधाम मंदिर से हरसिद्धि चौराहा तक ऑटो और ई-रिक्शा के संचालन पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया।
गुरुवार सुबह से ही प्रतिबंधित मार्गों पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया। यातायात पुलिस ने ऑटो और ई-रिक्शा चालकों को निर्धारित वैकल्पिक मार्गों की जानकारी देते हुए प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश से रोका।
प्रतिबंध के पहले ही दिन इन मार्गों पर वाहनों का दबाव कम दिखाई दिया, जिससे श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में अपेक्षाकृत कम परेशानी का सामना करना पड़ा। इस संबंध में ऑटो यूनियन और ई-रिक्शा संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी आयोजित की गई है।