शाजापुर। सतलोक आश्रम भिवानी, हरियाणा शहर के गुजरानी रोड़ स्थित सतलोक आश्रम में संत रामपाल जी महाराज का 37वा बौद्ध दिवस और कबीर परमेश्वर का निर्माण दिवस के उपलक्ष पर विशेष भंडारा ,संत गरीब दास जी महाराज लिखित सदग्रंथ का पाठ प्रकाश आयोजित हुआ, क्योंकि संत रामपाल जी महाराज को 17 फरवरी 1988 को उनके गुरु स्वामी रामदेवानंद जी महाराज से नाम दीक्षा बोध ज्ञान प्राप्त हुआ था , और साथ में कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस का भी आयोजन हुआ, आज के दिन कबीर परमेश्वर उत्तर प्रदेश के मगहर नामक स्थान से सशरीर सतलोक चले गए, और उनके साथ भविष्यवाणी भी हुई ,उठा लो पर्दा नहीं है मुर्दा, उनकी यादगार आज भी वहां मगहर में मौजूद है। क्योंकि उस समय मिथ्या प्रचलित धारणा थी कि जो मगहर में मरता है वह गधा बनता है।
कबीर परमेश्वर ने अपने जीवन काल में इस तरह के आडंबर पाखंडवाद का भी खंडन करने के लिए मगहर से शरीर छोड़ा था, उनके शरीर के स्थान पर मात्र कुछ फूल प्राप्त हुए, उनके आदेश अनुसार जो हिंदू काशी नरेश बिरदेव सिंह बघेल,और मुसलमान मगहर नवाब बिजली खां पठान ने आधा आधा बांटकर और अपनी मजार और मंदिर एक ही जगह पर स्थापित किया, जिसका प्रमाण आज भी विद्यमान है।
इस भंडारे के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों के द्वारा अनेकों दहेज मुक्त विवाह , 150 यूनिट रक्तदान किया गया, यहां पर प्रदर्शनी स्थल के माध्यम से भी उनके जीवन ,और कबीर साहब के निर्माण दिवस को भी दर्शाया गया ,संत रामपाल जी महाराज स्वच्छ समाज निर्माण की ओर प्रमुख भूमिका निभा रहे है। संत जी अनुयाई प्रेम प्रकाश दास के द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्तमान समाज में बढ़ती। इन बुराइयों से लड़ने की ताकत पूर्ण गुरु से नाम दीक्षा ग्रहण करके और सत भक्ति करने से ही प्राप्त होगी।
संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा ग्रहण करके आज लाखों लोग सामाजिक कुप्रथाओं व बुराइयों जैसे छुआ छूत, तेरहवीं, मृत्यु भोज नशा, दहेजप्रथा, कन्या भ्रूण हत्या आदि को जड़ से समाप्त करने हेतु डटकर मुकाबला कर रहे हैं। आज़ वर्तमान परिदृश्य में समाज सुधारक संत रामपाल जी महाराज आज मानव समाज को आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान कर नशा व दहेज मुक्त स्वच्छ समाज का नव निर्माण कर रहे हैं। भंडारे में शामिल हजारों की संख्या में से राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले से भी श्रद्धालु पहुंचे।