उज्जैन। भाजपा संगठन ने लोकसभा चुनाव में मंत्रियों और विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में मतदान बढ़ाने की जिम्मेदारी दी थी। वहीं देश के गृहमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि मतदान का प्रतिशत विधायक का रिपोर्ट कार्ड होगा। जिन मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्र में मतदान प्रतिशत कम होगा, उनका पद चला जाएगा।
ऐसे में उज्जैन संभाग के तीन मंत्रियों पर संकट के बादल है। इनके क्षेत्र में विधानसभा चुनाव की तुलना में लोकसभा में कम मतदान हुआ है। दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दूसरे चरण की वोटिंग के पहले 25 अप्रैल को भाजपा के दफ्तर में प्रदेश के बड़े नेताओं की एक बैठक ली थी। इसमें उन्होंने कहा था कि जिन मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्र में मतदान प्रतिशत कम होगा, उनका पद चला जाएगा। बदले में उन विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा, जिनके क्षेत्र में मतदान प्रतिशत बढ़ेगा। हालांकि, अमित शाह ने यह नहीं बताया कि कितने फीसदी कम वोटिंग पर मंत्रियों का पद जा सकता है।
इनके क्षेत्रों में कम मतदान-
राजेंद्र शुक्ल-रीवा, प्रहलाद सिंह पटेल- नरसिंहपुर विजय शाह-हरसूद, तुलसीराम सिलावट- सांवेर, राकेश सिंह- जबलपुर पश्चिम, राव उदय प्रताप सिंह-गाडरवारा, गोविंद सिंह राजपूत-सुरखी, प्रद्युम्न सिंह तोमर- ग्वालियर,विश्वास सारंग- नरेला, एदल सिंह कंसाना- सुमावली, करण सिंह वर्मा-इछावर, लखन पटेल- पथरिया, धर्मेन्द्र सिंह लोधी- जबेरा, संपतिया उइके- मंडला, राकेश शुक्ला- मेहगांव, निर्मला भूरिया- पेटलावद, दिलीप अहिरवार- चंदला, कृष्णा गौर- गोविंदपुरा, नारायण सिंह कुशवाह- ग्वालियर दक्षिण, राधा सिंह- चितरंगी, प्रतिमा बागरी- रैगांव, नरेंद्र शिवाजी पटेल- उदयपुरा, नारायण सिंह पंवार-ब्यावरा।
मंत्रियों के निर्वाचन क्षेत्रों में 22 प्रतिशत तक घटा मतदान-
पांच माह पूर्व हुए विधानसभा चुनाव में हजारों मतों के अंतर से जीतने वाले मंत्रियों के निर्वाचन क्षेत्र में हुए मतदान की तुलना हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव से की जाए तो इसमें 22 प्रतिशत की कमी आई है। सबसे बड़ी गिरावट मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के निर्वाचन क्षेत्र जबेरा में हुई। यहां विधानसभा चुनाव में 80.36 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो लोकसभा चुनाव में घटकर 58.39 प्रतिशत रह गया। यानी 21.97 प्रतिशत की कमी आई।
इस दृष्टि से सबसे बेहतर प्रदर्शन वन मंत्री नागर सिंह चौहान की विधानसभा सीट आलीराजपुर में रहा। यहां लोकसभा और विधानसभा चुनाव के मतदान में अंतर केवल 1.4 प्रतिशत रहा। भाजपा ने मंत्रियों और विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में मतदान बढ़ाने की जिम्मेदारी दी थी। मतदान केंद्र स्तर पर पन्ना और अर्द्ध पन्ना प्रभारियों को उतारा गया। घर-घर संपर्क का दौर चला और मतदान के दिन एक-एक मतदाता की चिंता की गई। इसके बाद भी मंत्री अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में मतदान को संभाल नहीं पाए।