उज्जैन। स्टॉप डायरिया कैंपेन सह दस्तक अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर गुरुवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार पटेल के निर्देशन में किया गया।
कार्यशाला में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जितेंद्र राजपूत, शहरी परियोजना अधिकारी दिलीप वसुनिया, सहायक कार्यक्रम प्रबंधक, पब्लिक हेल्थ मैनेजर, उज्जैन शहरी क्षेत्र के सुपरवाइजर एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सीएमएचओ डॉ. अशोक कुमार पटेल ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार बाल्यकालीन बीमारियों की पहचान, उपचार एवं आवश्यकता अनुसार रेफरल सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में दस्तक अभियान का प्रथम चरण 14 जुलाई से 31 अगस्त तक संचालित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि "स्टॉप डायरिया कैंपेन सह दस्तक अभियान" का उद्देश्य डायरिया की रोकथाम, स्वच्छता को बढ़ावा देना और "ओआरएस से रखें अपना ध्यान" थीम के तहत बच्चों को सुरक्षित रखना है। अभियान के दौरान जन्म से पांच वर्ष तक के बच्चों में गंभीर कुपोषण, एनीमिया, निमोनिया, निर्जलीकरण एवं संक्रमण की पहचान कर त्वरित उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
अभियान के तहत बच्चों को ओआरएस पैकेट एवं जिंक टैबलेट वितरित किए जाएंगे तथा नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए की खुराक दी जाएगी। साथ ही छह माह से पांच वर्ष तक के बच्चों में गंभीर एनीमिया की जांच कर आवश्यक उपचार किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त दल द्वारा एएनएम, आशा कार्यकर्ता एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर जाकर पांच वर्ष तक के बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाएगी। इस दौरान गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान, निमोनिया की जांच, दस्त रोग नियंत्रण, शिशु एवं बाल आहार संबंधी परामर्श तथा स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
अभियान में कम वजन वाले नवजात शिशुओं की उचित देखभाल के लिए कंगारू मदर केयर पद्धति के प्रति भी समुदाय को जागरूक किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे अभियान का लाभ लेकर बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण में सहयोग करें।