उज्जैन। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट-2012) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विद्यालयों में सुरक्षित एवं बाल-अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शासकीय हाई एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों के प्राचार्यों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित किया गया। कार्यक्रम जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास ब्रजेश कुमार त्रिपाठी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में उच्च न्यायालय की अधिवक्ता एवं विषय विशेषज्ञ सलोनी बाहेती ने पॉक्सो अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, अनिवार्य रिपोर्टिंग, पीड़ित बच्चों की गोपनीयता, विशेष न्यायालय की प्रक्रिया तथा विद्यालयों की कानूनी जिम्मेदारियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बच्चों को उनकी आयु के अनुरूप श्गुड टच-बैड टचश् की जानकारी देना आवश्यक है। साथ ही किसी भी लैंगिक अपराध की जानकारी मिलने पर 24 घंटे के भीतर पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को सूचना देना कानूनन अनिवार्य है।
जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्र खत्री ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम बच्चों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने शिक्षकों एवं प्राचार्यों से बच्चों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील रहते हुए समय पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी ब्रजेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यालयों में बाल संरक्षण संबंधी प्रक्रियाओं का प्रभावी पालन करने और सुरक्षित वातावरण विकसित करने पर जोर दिया।
वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक वीणा बौरासी ने महिलाओं एवं बालिकाओं को उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी दी।
प्रशिक्षण में जिले के करीब 200 शासकीय हाई एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों के प्राचार्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन प्रियंका त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यालयों को बच्चों के लिए सुरक्षित, संवेदनशील एवं बाल-अनुकूल बनाना तथा पॉक्सो अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति प्राचार्यों एवं शिक्षकों को जागरूक और उत्तरदायी बनाना था।