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July 10, 2026, 1:47 pm
KHABAR : राम मंदिर विवाद के बीच ओंकारेश्वर की मिसाल, करोड़ों का चढ़ावा, वीडियोग्राफी में गिनती और हर साल ऑडिट, पारदर्शी ‘दान मॉडल’, कलेक्टर-एसडीएम संभालते हैं कमान, पढे़ खबर

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खंड़वा। देशभर में मंदिरों में आने वाले चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। हाल ही में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की खबरों के बाद एक बार फिर मंदिरों की वित्तीय व्यवस्थाएं चर्चा में हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश के ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर मंदिर की व्यवस्था जानना महत्वपूर्ण हो जाता है, जहां हर वर्ष करोड़ों रुपए का दान प्राप्त होता है और उसके प्रबंधन के लिए एक निर्धारित ट्रस्ट प्रणाली कार्यरत है।


पब्लिक ट्रस्ट एक्ट 1951 के तहत सार्वजनिक ट्रस्ट घोषित
ओंकारेश्वर मंदिर को वर्ष 1959 में मध्यप्रदेश पब्लिक ट्रस्ट एक्ट 1951 के तहत सार्वजनिक ट्रस्ट घोषित किया गया था। मंदिर के संचालन और वित्तीय प्रबंधन के लिए सात सदस्यीय ट्रस्ट गठित है। इसमें मांधाता के राव मैनेजिंग ट्रस्टी होते हैं, जबकि उनके द्वारा एक अन्य ट्रस्टी नामित किया जाता है। इसके अलावा रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट, जिला पंचायत, जनपद पंचायत और नगर पंचायत की ओर से भी ट्रस्टी नियुक्त किए जाते हैं।


दान का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप
वर्तमान में राव पुष्पेंद्र सिंह मैनेजिंग ट्रस्टी हैं। खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ट्रस्टी के रूप में जुड़े हुए हैं, जबकि पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा ट्रस्ट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और अशोक महाजन सहायक मुख्य कार्यपालन अधिकारी (ACEO) की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ट्रस्ट का कहना है कि नियमित ऑडिट, दस्तावेजी रिकॉर्ड और प्रशासनिक निगरानी के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप और पारदर्शी तरीके से किया जाए।


पूरा रिकॉर्ड डिजिटल
ट्रस्ट का मुख्य कार्य मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे का व्यवस्थित प्रबंधन करना है। ऑनलाइन प्राप्त होने वाली दान राशि का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाता है, जबकि ऑफलाइन दान देने वाले श्रद्धालुओं को रसीद उपलब्ध कराई जाती है। आवश्यकता होने पर आयकर अधिनियम के तहत 80 सी प्रमाणपत्र भी जारी किया जाता है।


मंदिर ट्रस्ट का वार्षिक बजट लगभग 15 से 20 करोड़
दानपेटियों से प्राप्त राशि की गिनती प्रशासनिक निगरानी में की जाती है। ट्रस्ट के अनुसार, यह प्रक्रिया मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में और वीडियोग्राफी के साथ संपन्न होती है। गिनती पूरी होने के बाद राशि को विधिवत बैंक खातों में जमा कराया जाता है, जिससे वित्तीय पारदर्शिता बनी रहे। मंदिर ट्रस्ट का वार्षिक बजट लगभग 15 से 20 करोड़ रुपए के बीच रहता है। इस राशि का उपयोग मंदिर के रखरखाव, अधोसंरचनात्मक विकास कार्यों, धार्मिक व्यवस्थाओं तथा कर्मचारियों के वेतन और अन्य प्रशासनिक खर्चों पर किया जाता है।

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