सीहोर। मानसून सीजन होने के बाद भी सोयाबीन की फसलों पर शुरुआती दौर से ही कीटों ने हमला शुरू कर दिया है। इस बात की जानकारी कृषि वैज्ञानिकों के फसलों के किए गए जायजे के बाद सामने आई है।
जानकारी के अनुसार कृषि विज्ञान केंद्र सेवनिया के कृषि वैज्ञानिक दीपक कुशवाह ने टीम के साथ विकासखंड इछावर के ग्राम आमाझिर, मोगरा और नरसिंह खेड़ा में सोयाबीन फसल का भ्रमण किया।
भ्रमण के दौरान यह देखा गया कि मक्खी, कीट और सड़न रोग के कारण फसल पीली पड़कर सूख रही है और रोग के प्रकोप के कारण सोयाबीन फसल के पौधे जमीनी सतह से गलकर गिर रहे हैं।
किसानों को सलाह
भ्रमण के दौरान कीट व रोग के निदान के लिए किसानों को कीटनाशक इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत, एसएल 50 मिली प्रति एकड़, एसिटामेप्रिड 20 प्रतिशत, एसपी 50 ग्राम प्रति एकड़ व रोग के निदान के लिए थायोफिनेट मिथाइल 70 प्रतिशत, डब्ल्युपी 400 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 150 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई।
साथ ही सभी किसानों को सलाह दी गई कि अपनी फसलों कि सतत निगरानी करें और किसी भी प्रकार का रोग व कीट का प्रकोप दिखाई देने पर कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों व कृषि विभाग के अधिकारियों से सम्पर्क करें।