हरदा। जिला मुख्यालय की कृषि उपज मंडी में शुक्रवार को अनिश्चितकालीन धरने के दूसरे दिन भारतीय किसान संघ ने सरकार की सद्बुद्धि के लिए हवन किया है। वहीं सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर अपनी तीनों मांगों को पूरा करने का आग्रह किया है। खरीफ सीजन की वोवनी छोड़कर किसान ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल को समर्थन मूल्य पर खरीदने की मात्रा बढ़ाने को लेकर धरने पर बैठने को मजबूर हैं।
धरने के दूसरे दिन हरदा तहसील के अंतर्गत आने वाले गांवों के किसानों ने धरना दिया है। किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष सरकार ने समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का दाम 800 रुपए प्रति क्विंटल जरूर बढ़ाया है लेकिन खरीदी की मात्रा में पचास फीसदी कटौती की गई है, जबकि किसानों ने इस साल छह से आठ बोरा प्रति एकड़ मूंग की फसल का उत्पादन लिया है। लेकिन सरकार के द्वारा 8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है।
भारतीय किसान संघ के जिला प्रवक्ता राजनारायण गौर ने कहा कि जिले के सभी किसानों की तीन प्रमुख मांगे हैं, जिसमें पहली मांग मूंग खरीदी के दौरान खरीदी की मात्रा 8 से 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की जाए।दूसरी खरीदी के दौरान किसानों से एक दिन में 25 के बजाए 40 क्विंटल की खरीदी की जाए और तीसरी वेयर हाउस पर फसल की तुलाई बड़े प्लेट कांटे से की जाएं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसानों की तीनों जायज मांगो को नही मानती तो किसान सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने को मजबूर हो जाएगा।
कार्यक्रम में देवास जिले से राहुल जाट द्वारा ट्रैक्टर लेकर महिला शक्ति को लेकर आंदोलन में पधारे और समर्थन दिया। साथ ही प्रांतीय सदस्य नरेंद्र दोगने, जिला उपाध्यक्ष विनोद पाटिल ने संबोधित करते हुए कहा कि किसानों को प्रतिवर्ष अपनी मांगों को लेकर आंदोलन क्यों करना पड़ता है ये सोचने का विषय है। एक तरफ सरकार कहती हैं हम किसानों की सरकार है।तो फिर किसान को बार बार अपनी मांगों को लेकर क्यों आंदोलन करना पड़ता है, सर्वविदित है मूंग 6 बोरी प्रति एकड़ के हिसाब से उत्पादन होता है और पहले से भी यही नियम चल रहा था, तो फिर उस मात्रा के साथ छेड़छाड़ करना ये किसान हितैषी नहीं होने का सबूत है।
सभी सात तहसील के किसान देंगे धरना
भाकिसं के प्रवक्ता गौर ने बताया कि धरने के दूसरे दिन हरदा तहसील के अंतर्गत आने वाले किसान धरने में शामिल हुए है।इसके बाद टिमरनी, रहटगांव, खिरकिया, हंडिया,सिराली तहसीलों के किसानों के द्वारा धरना देकर अपनी मांगों को पूरा करने के लिए प्रदर्शन किया जाएगा।