उज्जैन। देश के ख्यात हास्य कवि रहे ओम व्यास ओम की पुण्यतिथि के अवसर ओर तरणताल कोठी रोड पर शहर के हास्य कवि एकत्रित हुए इस अवसर पर दो कवियों का सम्मान किया गया जिसमें कवि दिनेश दिग्गज को गारंटी अलंकरण और कुलदीप रंगीला को खटाखट सम्मान किया गया इस दौरान कवि को 8500 रुपए के नकली नोट और गोबी के फूल की माला पहनाई गई। कार्यक्रम के पश्चात एक पेड़ माँ के नाम के तहत हास्य और व्यंग्य के पौधों को लगाया गया।
ठहाकों की सुनामी था पंडित ओम व्यास ओम, हास्य का बड़ा नाम कर गये ओम जी, कुछ लोग तो जन्म जात सुमड़े थे, उनको भी हँसा गये ओम जी, ठाहकों की सुनामी लहर था पंडित ओम व्यास ओम, कवि दिनेश दिग्गज ने ओम व्यास ओम के 15 वें पुण्य अवसर पर ओम व्यास को हास्यांजलि के माध्यम से काव्य पुष्प अर्पित किये, दिग्गज ने कहा कि ना हो दीवार तो ये खिड़कियाँ काम आयेगी, ना हो इजहार की चीठ्ठियाँ क्या काम आयेगी, अगर जो पढ़ नहीं पाये किसी की आँख के आँसू, तुम्हारे नाम की ये डिग्रियाँ किस काम आयेगी।
देवास के कुलदीप रंगीला ने अपने अंदाज में हास्य व्यंग्य के तीर से मस्ती का इंद्र धनुष बनाते हुए कहा की तस्वीर अमीरी की जबसे नोट पर आ गई, मुफलिसी मेरे मुल्क की लंगोट में आ गई, रंगीला ने कहा कि ग्यारह बहन है मेरी बावीस भुआजियाँ, एक वक्त में लाता हूँ आठ सौ की सब्जियाँ, धनिया बचा ना राई राखी के बाद मे कैसे करूँ कमाई।
सूत्रधार स्वामी मुस्कुराके शैलेंद्र व्यास ने कहा कि.. हास्य समर्पित ओम था, था हँसाना काम अल्प समय में कर गया, जग में अपना नाम ओम हास्याय नमरू संस्था द्वारा पंडित ओम व्यास ओम के पुण्य तिथि स्मृति प्रसंग पर अंतर राष्ट्रीय कवि दिनेश दिग्गज को हास्य की ग्यारंटी अलंकरण एवम देवास के मस्ताने कवि कुलदीप रंगीला को खटाखट व्यंग्य सम्मान से विभूषित किया गया... व्यंग्यकार मुकेश जोशी, प्रेमसिंह यादव, दिनेश दयावान, ने 8 हजार 5 सौ रुपए के नकली नोट की माला, गोभी का फूल, ग्यारंटी की टोपी, खटाखट ताज पहनाकर तालियों के मध्य सम्मानित किया,।
कवि सुरेंद्र सर्किट ने कवि हास्य मंगला चरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि.. जिंदगी में कभी कोई रुकावट ना आये, सपने जो बुने है उनमें सजावट आये सारे काम आपके फटाफट हो जाये, खाते में आपके 8500 खटाखट आये।
कविराज सुगन चंद ने पत्नी पुराण पर व्यंग्य करते हुए कहा कि पत्नी जीवन का रंग भरा व्यंग्य है, पत्नी ही पति का सत्संग है कुछ कहते है पत्नी समस्या बड़ी है, हल्की फुल्की फुहारों में सावन की झड़ी है, कुछ को प्यार में जबरन गले पड़ी है।
आभार प्रदर्शन करते हुए कवि अशोक भाटी ने कहा कि, अर्पित हास्य सुमन करूँ, स्वीकारों तुम ओम, सात दिवस हँसते रहो, क्या रवि क्या सोम।
इस अवसर पर आलू बड़े का भोग लगाकर भंडारा किया गया ताली बजाने के लिये कवि नरेंद्र सिंह अकेला,संतोष सुपेकर, स्वामी दिल मिलाके, अनिल बारोड, अजय टिक्कु, प्रो. रवि नागाईच, अनिल पाँचाल सेवक, शशांक दुबे, जितेंद्र सिंह कुशवाह, गुड्डन खान, उमेश गुप्ता राकेश चौहान, अजीत पोरवाल, राजेंद्र सिंह चौहान, अजय आगरकर, अंकित मुथा, अनिल चावंड, मानसिंह टाटक, शेषमल कछवाय आमन्त्रित किये गये थे।