नीमच। केश लोचन आत्म कल्याण का उत्तम माध्यम है। चातुर्मास मुनियों के लिए ही नहीं श्रावक श्राविकाओं के लिए भी साधना का उत्तम साधन है। चातुर्मास आत्म साधना उत्तम समय माना जाता है। जिसने इस समय का सदुपयोग कर लिया उसके जीवन का कल्याण हो जाता है।यह बात वैराग्य सागर जी महाराज साहब ने कही।वे दिगंबर जैन समाज नीमच द्वारा दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित धर्म सभा में बोल रहे थे ।उन्होंने कहा कि केश लोचन आत्म मंथन का विषय है। वर्धमानसागर जी महाराज के सुशिष्य मुनि सुप्रभ सागर जी मसा ने अपने केश लोचन के बाद कहा कि केश लोचन करने से आत्मा पवित्र होती है। केश मानव का प्रमुख आकर्षण होता है। मुनी संत स्वयं अपने हाथों से लोचन कर संसार को त्याग की प्रेरणा देते है। चातुर्मास में कलश मंगल का प्रतीक है। श्रावक श्राविका तपस्या से जुड़कर 4 महीने तक स्वाध्याय तपस्या भक्ति के माध्यम से आत्म कल्याण के लिए पुरुषार्थ करें।
मंगल कलश स्थापना कल-
परम पूज्य चारित्र चक्रवर्ती 108 शांति सागर जी महामुनि राज के आचार्य पदारोहण के शताब्दी वर्ष मे परम पूज्य मुनि 108 श्री वैराग्य सागर जी महाराज एवं परम पूज्य मुनि 108 श्री सुप्रभ सागर जी महाराज जी का पावन सानिध्य मिला। मुनिद्वय के सानिध्य में हो रहे ऐतिहासिक कार्यक्रम की श्रृंखला में वीर शासन जयंती मनाई जाएगी। कार्यक्रम का शुभारंभ7 बजे मंगलाष्टक से होगा।7:10 बजे अभिषेक विधि प्रारम्भ होगा।7:45 बजे शांतिधारा 8बजे महावीर विधान प्रारम्भ, 8:45 बजे मुनिद्वय के पाद प्रक्षालन 8:50 बजे शास्त्रदान
8:55 बजे मुनिद्वय के प्रवचन 10:15 बजे आहार चर्या आयोजित होगी।
दिगम्बर जैन समाज एवं चातुर्मास समिति के अध्यक्ष विजय विनायका जैन ब्रोकर्स, मिडिया प्रभारी अमन विनायका ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के पावन उपलक्ष्य में रविवार को दोपहर 1.5 बजे मंगलाचरण होगा। अष्टानिका महोत्सव में 21 जुलाई को मंगल कलश की स्थापना का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। दोपहर 1.10बजे चित्र अनावरण, 1.15बजे पुर्वाचार्यो काअर्घ, आचार्य द्वय का अर्घ,1.20मुनि द्वय के पाद प्रक्षालन,1.25बजे शास्त्र दान,1.30बजेसंगीतमय गुरु पुजन,1.50बजे चातुर्मास निवेदन ,1.55बजे चातुर्मास कलश के पात्र चयन,3.30बजे मुनि द्वय के प्रवचन4.30बजे मंदिर में चातुर्मास ध्वजारोहण एवं कलश स्थापना सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे।