BREAKING NEWS
SHOK SAMACHAR : नहीं रही कैलाशी बाई सेन, परिवार में शोक.. <<     BIG NEWS : त्योहारों से पहले गरोठ में प्रशासन की.. <<     KHABAR : रोशनी के पर्व पर नीमच के प्रशासनिक मुखिया.. <<     BIG NEWS : नीमच में अवैध शराब के कारोबार पर आबकारी.. <<     KHABAR : दीपावली पर्व को लेकर शाजापुर पुलिस पूरी.. <<     KHABAR : मुरैना में मुख्यमंत्री मोहन यादव का एक.. <<     KHABAR : कलेक्टर हिमांशु चंद्रा की अध्यक्षता में.. <<     KHABAR : दीपों के महापर्व पर जनप्रतिनिधियों का.. <<     KHABAR : स्वामित्व अभिलेख पंजीयन में शत-प्रतिशत.. <<     KHABAR : ​​​​​​​धनतेरस और दीपोत्सव पर प्रभारी.. <<     BIG NEWS : टीएल में पहुंची शिकायत तो हरकत में आया.. <<     KHABAR : मलेरिया के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का.. <<     त्योहारों से पहले देवास में मिलावटखोरों पर.. <<     KHABAR : धनतेरस पर दमका बाजार, ग्राहकों से गुलजार.. <<     KHABAR : मुरार जिला अस्पताल के आउटसोर्स सफाई.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
August 10, 2026, 12:35 pm
KHABAR : एमपी में एशियाई शेरों को बसाने की तैयारी, चीता के बाद अब जंगलों में गूंजेगी शेर की दहाड़, नवंबर दिसंबर तक आ सकता है जोड़ा, पढे़ खबर 

Share On:-

भोपाल। मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट के बाद अब एशियाई शेरों को बसाने की दिशा में भी तैयारी तेज होती नजर आ रही है। प्रदेश के जंगलों में कभी एशियाई शेरों की मौजूदगी हुआ करती थी, लेकिन समय के साथ यह प्रजाति यहां से पूरी तरह समाप्त हो गई। अब एक बार फिर मध्यप्रदेश में एशियाई शेरों का कुनबा बसाने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।


मध्यप्रदेश के वन विभाग की योजना के तहत गुजरात से शुद्ध नस्ल के एशियाई शेरों को लाने और उनके प्रजनन के बाद जन्म लेने वाले शावकों को उपयुक्त वन क्षेत्रों में बसाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, फिलहाल एशियाई शेरों को मध्यप्रदेश में जंगल में छोड़ने के बजाय वन विहार जैसे नियंत्रित वातावरण में रखने और उनके संरक्षण एवं प्रजनन पर फोकस किया जा रहा है। गौरतलब है कि गुजरात के जूनागढ़ स्थित सक्करबाग जूलॉजिकल पार्क से दिसंबर 2024 में एशियाई शेरों का एक नर-मादा जोड़ा भोपाल के वन विहार लाया जा चुका है। यह जोड़ा वन्यजीव आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत गुजरात से मध्यप्रदेश आया था।


मध्यप्रदेश में एशियाई शेरों की वापसी की चर्चा इसलिए भी अहम है, क्योंकि कभी विंध्य, बुंदेलखंड और मध्य भारत के बड़े हिस्सों में इनकी मौजूदगी बताई जाती थी। लेकिन 19वीं सदी के अंत तक शेर मध्यप्रदेश से लगभग समाप्त हो गए। गुजरात में एशियाई शेरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2025 की गणना में गुजरात में 891 एशियाई शेर दर्ज किए गए थे, जिससे इनके लिए नए सुरक्षित आवासों की जरूरत और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। दक्षिण-एशियाईऔर प्रवासी


ऐसे में मध्यप्रदेश में शेरों को दोबारा बसाने की योजना सफल होती है तो यह राज्य के वन्यजीव संरक्षण के लिए एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है। हालांकि, जंगल में शेरों को बसाने से पहले उपयुक्त आवास, पर्याप्त शिकार आधार, सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे कई पहलुओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी होगा। अब देखना होगा कि एशियाई शेरों को मध्यप्रदेश के जंगलों में दोबारा बसाने की यह कवायद कब और किस स्वरूप में जमीन पर उतरती है।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE