भोपाल। स्कूल शिक्षा विभाग में उच्च पद के प्रभार की प्रक्रिया पूर्ण भी नहीं हुई कि अतिशेष शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में पदस्थ करने की प्रक्रिया शुरू हो गई। दोनों ही प्रक्रियाओं में विसंगति के आरोप लग रहे हैं। इसे लेकर शिक्षकों का कहना है कि हर प्रक्रिया में विसंगति से सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था चौपट हो रही है।
पिछले वर्ष से शिक्षकों को उच्च पद का प्रभार देने की प्रक्रिया चल रही है। एक साल से भी अधिक समय में उच्च पद के प्रभार के सभी आदेश जारी नहीं हो पाए हैं। इसी बीच विभाग ने अतिशेष शिक्षकों को समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। जबकि उच्च पद के प्रभार की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद एजुकेशन पोर्टल पर अपडेट किया जाना था। इसके बाद अतिशेष शिक्षकों की जानकारी इकट्ठी कर उन्हें समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू करनी थी।
एक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई और दूसरी शुरू होने से सबसे बड़ी समस्या यह हो गई है कि सेवानिवृत्त, त्यागपत्र दे चुके या स्कूल में पदस्थापना नहीं होने पर भी ऐसे शिक्षकों के नाम अतिशेष की सूची में आ गए हैं। इससे शिक्षकों में असुरक्षा की भावना घर कर गई है। शिक्षक संगठन कहते हैं कि जैसे-तैसे शिक्षक स्कूलों में शिक्षण कार्य के प्रति रुचि ले रहे थे। इसी बीच अतिशेष की प्रक्रिया आ गई। जिसमें पोर्टल अपडेट न होने के कारण कई विसंगतियां हैं।
शिक्षक नेता कहते हैं कि नियमों के विरुद्ध विभाग विकलांग, गंभीर बीमार, स्थानांतरित और उच्च पद का प्रभार प्राप्त शिक्षकों को भी अतिशेष बता रहा है। विभाग को अतिशेष शिक्षकों के समायोजन की इतनी जल्दी है कि पोर्टल अपडेट किए बिना ही अतिशेष शिक्षकों की काउंसिलिंग शुरू कर दी। अतिशेष शिक्षकों को अतिशेष सूची के संदर्भ में दावा आपत्ति का अभ्यावेदन दर्ज कराने का मौका भी नहीं दिया जाना विभाग की हठधर्मिता है।
शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने बताया कि शिक्षक संघों का एक प्रतिनिधिमंडल पोर्टल अपडेट होने तक विसंगतिपूर्ण अतिशेष शिक्षक प्रक्रिया पर रोक लगाने, उच्च पद के प्रभार की काउंसिलिंग में शामिल समस्त शिक्षकों के लंबित आदेश जारी कराने एवं शिक्षक संवर्ग की विभिन्न समस्याओं को लेकर आयुक्त लोक शिक्षण से चर्चा कर समस्याओं के निराकरण के लिए ज्ञापन सौपेगा।