हरदा। जिले में रबी सीजन शुरू होने के साथ ही जिले में खाद की किल्लत शुरू हो गई है। बोनी के लिए किसानों को डीएपी की जरूरत है, लेकिन सरकारी गोदामों पर यूरिया उपलब्ध है, जिसकी आवश्यकता किसानों को बोनी के करीब 20 दिनों बाद पड़ेगी। डीएपी लेने आने वाले किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
उधर, कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। खाद गोदाम प्रभारी का कहना है कि फिलहाल एनपीके उपलब्ध है।डीएपी आने में करीब एक सप्ताह और लग सकता है। डीएमओ गोदाम पर किसान रोज इस आस के साथ आता है कि उसे उसकी जरूरत की खाद मिल जाएगी, लेकिन उसे निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
एक एकड़ पर दी जा रही 1 बोरी डीएपी
कृषि प्रधान हरदा जिले में रबी सीजन में मुख्यतः गेहूं व चने की फसल लगाई जाती है। इस सीजन में चने का रकबा बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि उन्हें दोनों फसलों की बोवनी के साथ प्रति एकड़ डेढ़ से दो बोरी डीएपी की जरूरत पड़ती है, लेकिन सरकारी गोदामों ओर सोसायटी में उन्हें एक एकड़ पर एक बोरी ही डीएपी दी जा रही है।
जिले मे रबी सीजन के लिए डीएपी खाद की 15,000 मीट्रिक टन की थी, लेकिन अभी तक 8850 मीट्रिक टन उपलब्ध हो पाया है। वहीं, यूरिया की डिमांड पूरे सीजन के लिए 30,500 मीट्रिक टन की थी, 19,159 मीट्रिक टन यूरिया जिले मे आ चुका है। जबकि सिंगल सुपर फास्फेट की डिमांड 7500 मीट्रिक टन है। जो जिले में 9833 टन उपलब्ध हो गया है। कॉप्लेक्स की डिमांड 15000 मीट्रिक टन में 5865.1 व म्यूरेट ऑफ पोटाश 450 की डिमांड मीट्रिक टन थी, जिसमें 850 मीट्रिक टन आ चुका है।
किसान डीएपी की जगह सिंगल फास्फेट का करे उपयोग
उप संचालक कृषि संजय यादव का कहना है कि कृषि किसानों को रबी फसलों के लिए डीएपी की जगह सिंगल सुपर फॉस्फेट खाद का उपयोग भी करना चाहिए। इससे लागत कम होगी, उत्पादन अच्छा होगा और क्वालिटी भी अच्छी होगी। सिंगल सुपर फॉस्फेट फॉस्फोरिक युक्त खाद है, जिसमें 16 प्रतिशत फॉस्फोरिक और 11 प्रतिशत सल्फर और कैल्शियम होता है।वही एनपीके में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम होता है। इससे पौधों को संतुलित मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं