रीवा। खाद पाने के लिए मशक्कत जारी है। करहिया मंडी में किसान सुबह 4 बजे से खाद पाने के लिए लाइन में लगे हुए हैं। वहीं कुछ किसान तो ऐसे भी हैं, जो रात से ही खाद पाने के लिए लाइन में खाद वितरण केंद्र पहुंच गए थे। किसानों का कहना है कि हमें खाद कब तक मिल पाएगी, इसका कोई ठिकाना नहीं है। वही एक काउंटर तो ऐसा भी देखने को मिला, जिसमें खाद पाने के लिए सैकड़ों लोग खड़े थे, लेकिन काउंटर पर कोई भी नहीं था। कुर्सी पूरी तरह से खाली थी।
पैपखरा से आई अर्चना सिंह का कहना है कि शुक्रवार से खाद लेने के लिए यहां पर आ रहे हैं। बिना टोकन वालों को खाद दी जा रही है, लेकिन टोकन वाले लोगों को खाद नहीं मिल पा रही है। वहीं धरौरा के देवेंद्र सिंह का कहना है कि मैं कल रात 7 बजे से यहां पर मौजूद हूं। गद्दा-रजाई लेकर आया हूं। जैसे-तैसे रात काटी है, लेकिन लग रहा है कि खाद पाने के लिए एक रात यहीं पर और गुजारनी पड़ेगी।
रहट गांव की माया सिंह का कहना है कि खाद लेने के लिए सुबह 4रू00 बजे से लाइन में लगी हूं। सालभर की बच्ची है। वह मेरे इंतजार में रो रही होगी। अब भला मैं बिना खाद लिए कैसे लौट जाऊं। अब किसानी करना मुश्किल हो गया है।
कुसुम साहू का कहना है कि मुझे बीपी और सांस की बीमारी है। मैं सुबह 4रू00 बजे से भूखी-प्यासी लाइन में लगी हुई हूं। खाद कब तक मिल पाएगी, इसका कोई ठिकाना नहीं है। खाद के लिए मैं बेहद परेशान हो चुकी हूं। समझ नहीं आ रहा है कि खाद लेने के लिए यहां पर इंतजार करूं या फिर घर लौट जाऊ।
तहसीलदार बोले-नीयत समय पर खुलता है काउंटर
तहसीलदार शिव शंकर शुक्ला ने बताया कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां पर किसानों की संख्या बहुत अधिक है। काउंटर अपने नियत समय में चालू होता है, लेकिन लोग यहां पर सुबह 3 बजे से ही पहुंच गए थे। लोग अपनी-अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। हमने चार काउंटर बनाए हैं। एक ही काउंटर के बाहर लोगों ने दो लाइन लगा ली थी। जिन्हें समझाइश देकर एक लाइन बनवाई गई है।
रीवा में सोमवार से लेकर शुक्रवार तक जहां एक ओर खाद वितरण केंद्रो में लोगों की लंबी लाइन लग रही है। वहीं रविवार को रीवा के करहिया मंडी में खाद लेने के लिए पहुंचे लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा था। कारण था कि उन्हें खाद वितरण केंद्र बंद मिला। लोगों का यह भी कहना था कि कलेक्टर के आदेश के बाद हम ये सुनकर आए थे की अब शनिवार और रविवार को भी खाद वितरण केंद्र सुबह से शाम तक खुले रहेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। रविवार को हम सुबह से शाम तक बैठे रहे। कुछ लोगों ने बताया था कि हम 40 और 50 किलोमीटर दूर से आए हैं।