नर्मदापुरम। दिल्ली के गुरुग्राम में आयोजित 11वें नेशनल अबिलम्पिक्स चौंपियनशिप 2024 में नर्मदापुरम के दिव्यांग छात्र चौतन्य माकवे ने वेब डिजाइनिंग में कांस्य पदक जीता। चेतन का चयन हेलसिंकी (फिनलैंड) में साल 2027 में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय अबिलिम्पिक्स के लिए हुआ है।
नेशनल अबिलम्पिक एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा गुरुग्राम में 6-7 दिसंबर को 11वें नेशनल अबिलम्पिक्स का आयोजन किया गया। जिसमें भारत के पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण क्षेत्रों से 90 से अधिक दिव्यांगजन ने अपनी उत्कृष्ट प्रतिभाएं प्रदर्शित की। प्रतिभागियों ने सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, शिल्प, खाद्य, और सेवाओं सहित 15 कौशल श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा की। इस दो दिवसीय कार्यक्रम ने 28 सदस्यीय रूसी प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया था, जिसमें नर्मदापुरम से चौतन्य माकवे (वेब डिज़ाइनिंग) और लखन चौहान (वर्ड प्रोसेसिंग) शामिल हुए।
नर्मदापुरम के कंप्यूटर सेंटर नर्मदापुरम की सेंटर कोऑर्डिनेटर अश्विनी पाल के मार्गदर्शन में चेतन्य माकवे और लखन चौहान ने चौंपियनशिप में मप्र का प्रतिनिधित्व किया।
चौतन्य माकवे ने वेब डिजाइनिंग में कांस्य पदक इतिहास रचा। चेतन्य माकवे आगामी समय में इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन में इंडिया को रिप्रजेंट करेंगे। दोनों छात्रों ने अपने कौशल का प्रदर्शन कर नर्मदापुरम का नाम गौरवान्वित किया।
दिव्यांगजन खिलाड़ियों के लिए होती है अबिलम्पिक्स प्रतियोगिता
अबिलम्पिक्स, जिसे ष्क्षमताओं के ओलंपिकष् के नाम से जाना जाता है, दिव्यांगजन के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय कौशल आधारित प्रतियोगिता है, जो हर चार साल में आयोजित होती है और इसमें उनकी क्षमताओं का उत्सव मनाया जाता है और वैश्विक मंच पर समावेशिता को बढ़ावा दिया जाता है। इस पहल का उद्देश्य आगामी 11वें अंतर्राष्ट्रीय अबिलम्पिक्स को बढ़ावा देना है, जो 2027 में हेलसिंकी (फिनलैंड) में आयोजित होने वाला है।