बैतूल। जिले में स्वास्थ्य संवर्ग के कर्मचारी बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। अपने प्रदेशव्यापी आंदोलन के तहत आज उन्होंने बैतूल में सीएमएचओ और सीएस को पत्र सौंप कर अपनी हड़ताल की सूचना दी है। महासंघ ने इससे होने वाली असुविधा के लिए खेद जताया है।
जानकारी के अनुसार, समस्त स्वास्थ्य अधिकारी, कर्मचारी महासंघ (म.प्र. के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और आयुष विभाग के अधिकारी, कर्मचारियों का महासंघ) ने इस हड़ताल की सूचना दी है। जिसमें जिला, प्रदेश, के समस्त स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा विभाग के एनएचएम संविदा, आउट सोर्स, रोगी कल्याण समिति, नर्सिंग संवर्ग, पैरामेडिकल आदि समस्त संवर्ग के स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी प्रदेश व्यापी हड़ताल पर जाएंगे।
महासंघ ने बताई यह समस्या
संघ के सदस्यों ने बताया कि सभी संवर्ग की 15 सूत्रीय मांगों के निराकरण के लिए शासन, विभाग से निरंतर महासंघ द्वारा चर्चा की गई है। इसके लिए 11 नवंबर को चरणबद्ध आंदोलन भी किया गया था।
उन्होंने कहा कि हमें मरीजों की परेशानियों का एहसास होता है, इसे ध्यान में रखते हुए हम सभी नहीं चाहते हैं कि हड़ताल पर जाए। लेकिन, विभाग की हठ धर्मिता, तानाशाही, मनमानी के चलते मजबूरन 11 दिसम्बर से जिला, प्रदेश, के समस्त स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा विभाग के एनएचएम संविदा, आउट सोर्स, रोगी कल्याण समिति, नर्सिंग संवर्ग, पैरामेडिकल आदि समस्त संवर्ग के स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी प्रदेश व्यापी हड़ताल पर जाएंगे।
यह है प्रमुख मांग
1. अन्य राज्यों की तरह स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, विभाग के तहत कैडर की वेतन विसंगति दूर कर प्रस्तावित वेतनमान दिया जाए।
2. नर्सेस और अन्य पैरामेडिकल कर्मचारियों को भी 300 रुपए प्रति रात्रि आकस्मिक चिकित्सा भत्ता दिया जाए।
3. रेडियोंलॉजी विभाग में कार्य करने वाले कर्मचारी (रेडियोग्राफर, डार्क रूम असिस्टेंट / अटेन्डेंट और संविदा कर्मचारी) को रेडिएशन जोखिम भत्ता रू. 50 से बढ़ाकर मूल वेतन का 25 प्रतिशत दिया जाए।
4. प्रदेश के शेष अन्य चिकित्सा महाविद्यालय में कार्यरत नर्सिंग आफिसर को समान रूप से जीएनएम अर्हताधारी स्टॉफ को 3 और बीएससी नर्सिंग स्टॉफ को 4 वेतन वृद्धि प्रदान की जाए।
5. चिकित्सकों की तरह स्वशासी में कार्यरत समस्त कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का वास्तविक लाभ प्रदान किया जाए।
6. अन्य राज्यों की भांति स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, शिक्षा, विभाग अंतर्गत विभिन्न कैडरों के पदनाम परिवर्तन किया जाए।