ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में उस वक्त एक अजीब नजारा देखने को मिला, जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पैरों में एक आदिवासी महिला अपने पति के साथ रोती हुई गिर गई। वह बार-बार महाराज न्याय दिलाओ की गुहार लगाती नजर आई। उसने केंद्रीय मंत्री सिंधिया को अपना दर्द कागज के पन्नों पर लिख कर दिया, जिसमें कानून और अधिकारियों पर सीधे सवाल उठाए।
पैरों में गिरकर महाराज न्याय दिलाओ की लगाई गुहार
दरअसल केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने जयविलास पैलेस पर आम लोगो से मुलाकात की। इस दौरान शिवपुरी जिले से एक दर्जन से अधिक आदिवासी भी पहुंचे। इनमें पोहरी जनपद क्षेत्र के उपसिल गांव की महिला आदिवासी सरपंच कुसमा बाई भी शामिल थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास पहुंच कर आदिवासी महिला सरपंच और उसका पति उनके पैरों में गिर गए और महाराज न्याय दिलाओ की गुहार लगाने लगे। सिंधिया ने उनसे उनका आवेदन लिया और उनकी परेशानी दूर करने का आश्वासन दिया।
पंचायत सचिव पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
उपसिल गांव की आदिवासी महिला सरपंच कुसमा बाई का कहना है कि वह विशेष पिछड़ी सहरिया जनजाति से आती है और पढ़ी-लिखी नहीं है। इस बात का फायदा उठाकर उनकी ग्राम पंचायत का सचिव मस्तराम धाकड़ जबरन भ्रष्टाचार करने कागजो पर अंगूठा लगाने का दबाव बनाता है। जब इसका विरोध किया तो वह उन्हें पद से हटवाने की धमकी देता रहा और आखिरकार उसने पंचायत के पंचों की खरीद फरोख्त और डरा धमका कर उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला दिया। उसकी राजनीति में मजबूत पकड़ है, जिसके चलते उसके न्याय की गुहार भरे पूर्व में दिए गए कई आवेदनों पर कोई कार्यवाही और सुनवाई नहीं की गई।
न्याय भी अब बड़े लोगों की इच्छा पर निर्भर
महिला सरपंच ने कहा कि अब ऐसा लगने लगा है कि आपका कानून और आपके अधिकारी सिर्फ बड़े लोगों के कहने पर ही चलते हैं। आम आदमी के लिए न्याय भी अब बड़े लोगों की इच्छा पर निर्भर हो गया है। लिहाजा एक बार फिर गुहार लगाती हूँ कि मेरे खिलाफ पंचायत सचिव द्वारा षडयंत्र पूर्वक लाये गए अविश्वास प्रस्ताव में बहुमत साबित करने के लिए एक माह का समय दिया जाए। बता दें कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का संसदीय क्षेत्र शिवपुरी और गुना है। यही वजह है कि यह आदिवासी महिला सरपंच उनसे न्याय की गुहार लगाने पहुंची थी।