भोपाल। पेट्रोल का रेट 106 रुपए 52 पैसे प्रति लीटर है और कर्मचारी औसत 10 किलो मीटर दूर से आते हैं, स्कूटर या बाइक 40 से 50 किलो मीटर का एवरेज देती है। ऐसे में 200 रुपए प्रति माह परिवहन भत्ता नाइंसाफी नहीं तो क्या है? सरकार ने 13 साल से भत्ते में वृद्धि नहीं की है, जबकि इन सालों में महंगाई दो गुना बढ़ गई है। 200 रुपए का पेट्रोल 3 दिन भी नहीं चलता। ऐसी ही 17 मांगों को लेकर मप्र मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने 4 मार्च को मंत्रालय के पुराने भवन के सामने सुंदरकांड-हनुमान चालीसा का पाठ करने का निर्णय लिया है। संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने मंत्रालय के कर्मचारियों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। उनकी एक पोस्ट मंत्रालय कर्मचारियों के वॉट्सएप ग्रुपों में चल रही है, जिसमें वे मांगों को पूरा कराने के लिए एकजुटता दिखाने का आव्हान कर रहे हैं। वे बता रहे हैं कि पिछले दो दशक में कर्मचारियों का कितना नुकसान हो चुका है और अब एकजुटता दिखाने के समय आ चुका है। अब भी ध्यान नहीं दिया, तो बहुत देरी हो जाएगी। नायक कहते हैं कि प्रदेश में 9 साल से कर्मचारियों को पदोन्नति नहीं दी जा रही है, जो सरकार की मनमानी को उजाकर करती है। नायक कहते हैं कि सरकार ने क्रमबद्ध तरीके से कर्मचारियों से उनके अधिकार छीने हैं। पहले कर्मचारियों को सरकारी बसों से पास के जरिए ऑफिस आने का लाभ दिया जाता था, जो बंद कर दिया। मजबूरी में कर्मचारियों को वाहन खरीदने पड़े और अब उन्हीं से आ रहे हैं। इसके बदले सरकार हर माह 200 रुपए परिवहन भत्ता दे रही है। आज 200 रुपए में 2 लीटर भी पेट्रोल नहीं आता। बिना किसी तैयारी के केवल मंत्रालय में ई-फाइलिंग, ई-अटैंडेंस जैसे प्रयोग किए जा रहे हैं। पदोन्नति बंद होने की आड़ में बाहर से कर्मचारी अधिकारी लाकर मंत्रालय में भरे जा रहे हैं। मंत्रालय के कर्मचारी उपेक्षित हैं और बाहर वालों का बोलबाला है। बाहर से आए अधिकारियों-कर्मचारियों की लाबी मंत्रालय में पदोन्नति नहीं होने देना चाहती। अभी वित्त सेवा के लोगों को मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी और सहायक अनुभाग अधिकारी बनाया गया है। मंत्रालय के कर्मचारियों की स्थिति बहुत खराब कर दी गई है। जिसका असर पूरे प्रदेश पर पड़ रहा है। विभाग प्रमुख कार्यालयों के कर्मचारियों को चौथा समयमान वेतनमान दे दिया, पर मंत्रालय को नहीं दिया। सामान्य प्रशासन विभाग के 9 मार्च 2020 के परिपत्र के आधार पर कोष एवं लेखा, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, जनजातीय कार्य सहित अन्य विभागों ने समयमान के साथ उच्च पदनाम देने की व्यवस्था कर ली पर स्वयं सामान्य प्रशासन विभाग ने नहीं की। सचिवालय भत्ता में 12 साल से वृद्धि नहीं की गई। कर्मचारी/पेंशनर्स चिकित्सा बीमा योजना वर्तमान मुख्य सचिव ने प्रमुख सचिव वित्त रहते हुए बनाई थी, लेकिन आज तक लागू नहीं हो पाई। नए कर्मचारियों को 70 प्रतिशत, 80 प्रतिशत वेतन देने का काला कानून है। सहायक ग्रेड 3, डाटा एंट्री ऑपरेटर की ग्रेड पे 2400 रुपए करने की बात है। नायक कहते हैं कि विधि सम्मत मेडिकल बिलों में भी अड़ंगे लगाए जा रहे हैं। मंत्री स्थापना और मंत्रालय स्थापना में कई सालों से लगे कंटरजेंसी कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जा रहा है। 7वां वेतनमान लागू होने के 10 साल पूरे हो रहे हैं, पर स्थाई कर्मियों को नहीं दिया। आउटसोर्स कर्मचारियों को श्रमिक न मानकर कर्मचारी माना जाना चाहिए और उस पद का न्यूनतम वेतन मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि 4 मार्च का आंदोलन हक की लड़ाई फिर से लड़ने का संकेत है। 4 मार्च का आंदोलन इस बात का संकेत है कि मंत्रालय का कर्मचारी अब चुप नहीं बैठेगा। अपने हक के लिए मैदान में उतरने से पीछे नहीं हटेगा। हम श्जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसाश् की भावना के साथ यह आंदोलन कर रहे हैं।