इंदौर। आउटर रिंग रोड के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों ने गुरुवार से कलेक्टोरेट के सामने अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। इसके लिए किसान पूरी तैयारी में दिख रहे हैं। इंदौर और आसपास के किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली में खाने और रूकने की व्यवस्था साथ लेकर पहुंचे है। करणी सेना ने भी किसानों को समर्थन दिया है।
किसानों ने कंडे, घी, दाल, आटा, बर्तन और रात्रि विश्राम के लिए बिस्तर, गद्दे और कंबल रात को ही गाड़ियों में भर लिए थे। गुरुवार सुबह से उन्होंने कलेक्टोरेट के सामने धरना दे दिया हैं।
ये हैं किसानों की मांगें
इंदौर में पूर्वी और पश्चिमी रिंग रोड निर्माण कार्य के लिए किया जाने वाला जॉइंट सर्वे तत्काल बंद किया जाए।
केंद्रीय भू-अधिग्रहण कानून 2014 को संपूर्ण राज्य में जल्द लागू किया जाए।
पिछले 12 सालों से गाइडलाइन नहीं बढ़ाई गई है, इसे हर साल 25 प्रतिशत की दर से बढ़ाया जाए।
बढ़ी हुई गाइडलाइन के आधार पर चार गुना मुआवजा दिया जाए।
आउटर रिंग रोड के लिए जारी किए गए वर्तमान राजपत्र को निरस्त कर गाइडलाइन बढ़ाने के बाद नया राजपत्र जारी किया जाए।
किसी भी जमीन अधिग्रहण योजना में किसानों की सहमति के बिना अधिग्रहण प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए।
मध्य प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों को भंग किया जाए। किसानों का आरोप है कि आईडीए (इंदौर विकास प्राधिकरण) अपना उद्देश्य भूल चुका है और अब केवल सरकारी भू-माफिया की तरह काम कर रहा है।
किसानों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों को प्राथमिकता से स्वीकार किया जाए, अन्यथा भारतीय किसान संघ बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होगा। संघ के प्रचार-प्रसार प्रमुख राहुल मालवीय ने बताया कि प्रदेश और राष्ट्रहित में किसान संघ की मांग है कि मध्य प्रदेश में भूमि अधिग्रहण कानून 2013 को उसके मूल स्वरूप में लागू किया जाए, ताकि संतुलित विकास हो सके।