छतरपुर। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत स्वर्गेश्वर धाम को धार्मिक पर्यटन स्थल घोषित करने की माँग को लेकर ग्रामीणों के साथ युवा पत्रकार समीर ने पदयात्रा की शुरुआत की है। यह मुहिम उस प्राचीन स्थल को संरक्षित करने की दिशा में है, जो न केवल धार्मिक श्रद्धा का केंद्र है बल्कि वीरता और इतिहास का प्रतीक भी है।
स्वर्गेश्वर धाम को महान बुंदेला योद्धाओं आल्हा और ऊदल की तपोस्थली माना जाता है। 12वीं शताब्दी में महोबा राज्य के राजा परमाल के सेनापति रहे आल्हा और ऊदल को बुंदेलखंड का गर्व माना जाता है।ऐसा कहा जाता है कि युद्ध से पहले आल्हा इसी स्थान पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर में आराधना करते थे। कई लोकगाथाएं और बुंदेलखंडी आल्हा गायन आज भी इस धाम की महिमा का बखान करते हैं स्वर्गेश्वर धाम में उनकी आत्मिक शक्ति आज भी विद्यमान है।
यह धाम पन्ना टाइगर रिजर्व के चंद्रनगर रेंज क्षेत्र के मनियगढ़ पहाड़ी पर स्थित है। यह स्थान न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर है, बल्कि पर्यटन की असीम संभावनाएं भी रखता है। बावजूद इसके, प्रशासनिक उपेक्षा के कारण यहाँ न तो मूलभूत सुविधाएँ हैं और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम। कुछ दिनों पहले धाम में चोरी की घटना सामने आई,प्रवेश द्वार से लेकर मंदिर परिसर से घंटे चोरी हुई। इस घटना ने स्थानीय लोगों की आस्था को झकझोर दिया है।
उनकी माँग है कि स्वर्गेश्वर धाम को धार्मिक पर्यटन स्थल घोषित किया जाए, ताकि इसकी सुरक्षा और विकास सुनिश्चित हो सके और आल्हा-ऊदल की विरासत को भावी पीढ़ियों तक संरक्षित रखा जा सके। समीर अवस्थी ने बताया कि मेरी पहल को जनसमर्थन मिलने लगा है। कई स्थानीय युवाओं, सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने इस मुहिम में भागीदारी दिखाई है। पदयात्रा के ज़रिए वह एक जन आंदोलन की शक्ल ले रही है।