उज्जैन। क्रांतिकारी वीर मंगल पांडे को लेकर राम जन्मभूमि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी द्वारा हनुमंत कथा के दौरान की गई टिप्पणी पर विवाद गहरा गया है। उज्जैन की महाकाल सेना ने आरोप लगाया है कि गोविंद देव गिरी ने कथा के दौरान मंगल पांडे के कारण देशभर में होने वाली 1857 की क्रांति को विफल बताया।
गोविंद देव गिरी ने कथित रूप से कहा कि यदि मंगल पांडे चर्बी वाले कारतूस का विरोध नहीं करते, तो देश 1857 में ही आजाद हो जाता।
बयान के विरोध में महाकाल सेना के राष्ट्रीय प्रमुख और महाकाल मंदिर के पुजारी महेश पुजारी ने कहा कि गोविंद देव गिरी ने हनुमंत कथा के विषय से भटकते हुए 1857 की क्रांति को ही गलत ठहरा दिया, जो देश के वीर क्रांतिकारियों का अपमान है।
पीएम-यूपी सीएम के नाम लिखा पत्र
उन्होंने कहा कि यदि गोविंद देव गिरी मंगल पांडे की क्रांति को सही नहीं मानते, तो वह स्पष्ट करें कि उस समय देश में क्रांति का नेतृत्व कौन कर रहा था और किसने क्रांतिकारी योजना बनाई थी।
महाकाल सेना ने प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर गोविंद देव गिरी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि मंगल पांडे ने कारतूस पर लगी चर्बी का विरोध कर अपने ब्राह्मण धर्म और देश के प्रति निष्ठा निभाई थी। उन्होंने अपने धर्म और देश के लिए प्राणों की आहुति दी, ऐसे महान क्रांतिकारी का अपमान असहनीय है।
महाकाल सेना ने चेतावनी दी है कि यदि गोविंद देव गिरी देश के क्रांतिवीरों और ब्राह्मण समाज से माफी नहीं मांगते, तो देशभर में आंदोलन किए जाएंगे और आवश्यकता पड़ी तो उनके पुतले भी दहन किए जाएंगे।
इस टिप्पणी को लेकर हो रहा विवाद
महेश पुजारी ने बताया कि पिछले दिनों ब्यावर राजस्थान में गोविंद देव गिरी ने व्यासपीठ से हनुमंत कथा में मंगल पांडे के कारण देश भर में होने वाली क्रांति को विफल बताया। उन्होंने कहा था कि यदि मंगल पांडे कारतूस का विरोध नहीं करते तो देश 1857 में ही आजाद हो जाता क्योंकि क्रांति की ऐसी भूमिका बनाई गई थी, जिससे एक साथ क्रांति प्रारम्भ होती और देश आजाद हो जाता।