शाजापुर। देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए लद्दाख में वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय सेना के जवान सुरेंद्र गदारिया की शहादत ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। मंगलवार की सुबह देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले इस वीर सपूत को नमन करते हुए बुधवार को शाजापुर जिले के बेरछा नगर में एक अत्यंत भावुक दृश्य सामने आया। शहीद की पत्नी अनिता बामनिया को नगरवासियों ने गर्व और सम्मान के साथ तिरंगा यात्रा के माध्यम से इंदौर के लिए विदा किया।
यह तिरंगा यात्रा समाजसेवी हाजी मुन्ना पठान के नेतृत्व में आयोजित की गई। यात्रा की शुरुआत अनिता बामनिया के घर से हुई, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए मंदिर चौराहे पर पहुंची। वहां एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जहां नगरवासियों ने अश्रुपूरित नेत्रों से शहीद सुरेंद्र गदारिया को नमन किया।
शहीद जवान सुरेंद्र गदारिया मूल रूप से देवास जिले के हाटपिपल्या तहसील के ग्राम बड़िया मांडू के निवासी थे। वे वर्तमान में लद्दाख में तैनात थे और मंगलवार को वीरगति को प्राप्त हुए। उनका विवाह पांच वर्ष पूर्व बेरछा निवासी अनिता बामनिया से हुआ था, जो इस समय अपनी दूसरी संतान के जन्म हेतु अपने मायके में हैं। वे अपने चार वर्षीय पुत्र रुद्र के साथ परिवार में रह रही हैं।
बुधवार शाम जब शहीद का पार्थिव शरीर इंदौर लाया गया, तो उससे पूर्व नगरवासियों ने अनिता बामनिया को ष्जय हिंदष् के नारों के साथ विदा किया। यह यात्रा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि देशभक्ति, श्रद्धा और सामूहिक सम्मान का प्रतीक बन गई।
इस मौके पर हाजी मुन्ना पठान ने कहा, ष्यह यात्रा शहीद की पत्नी को श्रद्धांजलि देने का माध्यम भर नहीं थी, बल्कि यह पूरे समाज की ओर से उनके बलिदान के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को प्रकट करने का एक प्रयास था।
इस अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे, जिनमें डॉ. ओपी नागर, डॉ. सीपी नाहर, भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष केतल पटेल, डॉ. मनोज शर्मा, राजेंद्र जैन, शलभ शर्मा, सुनील नाहर, कैलाश जैन, एडवोकेट सईद पठान, सतीश मंडलोई, एडवोकेट जावेद पठान, संतोष बामनिया, मनोहर बामनिया, विष्णु पाटीदार, रशीद खान, समीउल्ला लाला, सौदानसिंह, नितिन वर्मा, अकबर खान, आरिफ खान, एडवोकेट सावेद पठान, सादिक शेख, भगवानसिंह सहित बड़ी संख्या में महिलाएं एवं पुरुष मौजूद रहे।
इस आयोजन ने न केवल शहीद को श्रद्धांजलि दी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश भी छोड़ा कि देश की रक्षा के लिए दिए गए बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।