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May 29, 2025, 6:41 pm
KHABAR : दिव्यांगों के अनुदान के लिए कलेक्टरों को मिले अधिकार, निराश्रित निधि से आश्रम संचालन और कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान कर सकेंगे कलेक्टर, पढे़ खबर 

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भोपाल। वरिष्ठजन आश्रम एवं दिव्यांग पुनर्वास केंद्रों के संचालन और इनके कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान अब निराश्रित निधि से किया जा सकेगा। सामाजिक न्याय विभाग ने इसके अधिकार कलेक्टरों को दे दिए हैं। वे अधिकतम 2 लाख रुपए खर्च कर सकेंगे। इससे आश्रम में रहने वाले और दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के संचालन में होने वाली दिक्कतों में कमी आएगी। कलेक्टरों से यह भी कहा गया है कि अगर इस संबंध में तय राशि का भुगतान नहीं किया जाता तो इसे वित्तीय अनियमितता माना जाएगा।


प्रदेश में 44 जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र, 21 वरिष्ठ आश्रम का संचालन जन सहयोग से, 16 वरिष्ठ आश्रम का संचालन केन्द्रीय अनुदान से एवं 30 जिलों में 36 वरिष्ठ आश्रम का संचालन निराश्रित निधि से किया जा रहा है। इसके कर्मचारियों के मानदेय भुगतान में अब देर नहीं होगी। कलेक्टर अपने स्तर पर ही निर्णय ले सकेंगे। सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की प्रमुख सचिव सोनाली पोंक्षे वायंगणकर ने इसको लेकर निर्देश जारी किए हैं।


प्रमुख सचिव वायंगणकर ने कहा कि राज्य शासन हर वित्तीय वर्ष में जिला स्तर पर निराश्रित निधि से किए जाने वाले खर्च के लिए राज्य निधि का निर्धारण करता है, जिसमें ब्याज और मूलधन की राशि समाहित होती है। कई जिलों में वर्ष के शुरुआती तीन से चार महीने के बाद इस निधि में ब्याज की रकम नाम मात्र रह जाती है। इस कारण जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र में काम करने वाले कर्मचारियों एवं वरिष्ठ आश्रम में कार्यरत कर्मचारियों के मानदेय के भुगतान में दिक्कत आती है। साथ ही वरिष्ठ आश्रमों को अनुदान का भुगतान भी पेंडिंग रह जाता है।


प्रमुख सचिव के अनुसार शासन ने तय किया है कि राज्य की निराश्रित निधि से सभी जिला कलेक्टर्स ब्याज की राशि से 2 लाख तक खर्च कर सकेंगे। जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र में कार्यरत अमले को मानदेय का भुगतान एवं वरिष्ठ आश्रम के कर्मचारियों के मानदेय के साथ-साथ वरिष्ठ आश्रम को अनुदान का पेमेंट इससे किया जा सकेगा। यह पेमेंट निराश्रित निधि के मूलधन की राशि से किए जाएंगे।

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