भोपाल। एक समय सड़कों पर दौड़ीं बसें कंडम होने के बाद टॉयलेट के काम आएंगी। पर्यटन विभाग ने इन बसों को महिलाओं के उपयोग के लिए पिंक टॉयलेट के रूप में तैयार करने का निर्णय लिया है। प्रदेश की पहली पिंक टॉयलेट का दो दिन पहले पचमढ़ी में लोकार्पण हो चुका है, जबकि जल्द ही ओरछा में भी ऐसी ही टॉयलेट स्थापित होगी। इसका संचालन स्व-सहायता समूह करेंगे और जरूरत पड़ने पर इसे एक से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकेगा।
प्रदेश के बड़े शहरों में यातायात व्यवस्था के उपयोग में आने वाली कई बसें अब कंडम हो चुकी हैं। जिनका इस्तेमाल अब सवारी परिवहन में नहीं किया जा सकता है। ऐसी बसों का उपयोग पर्यटन विभाग करेगा। इसमें टॉयलेट बनाए जाएंगे, जो महिला एवं पुरुष इस्तेमाल कर सकेंगे। इन टॉयलेट के पास कैफेटेरिया भी बनाए जाएंगे। ऐसी ही एक बस को पचमढ़ी में पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला ने लोकार्पित किया है।
शुक्ला ने कहा कि बगैर किसी सरकारी खर्च के इस तरह की चार पिंक टॉयलेट बसों को तैयार करके पचमढ़ी और ओरछा में रखा जाएगा, जो पर्यटन के लिए पहुंचने वाली महिलाओं के लिए उपयोगी होंगे। प्रमुख सचिव शुक्ला ने दैनिक भास्कर से चर्चा में कहा कि ऐसी बसें जो कंडम हो चुकी हैं और जिनका उपयोग नहीं है, जो सिर्फ स्क्रैप हैं। इस तरह की कंडम हो चुकी बसों को महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट के रूप में तैयार कर उपयोग में लाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि महिलाएं ही इसका संचालन करेंगी। सरकार की मंशा के बाद पर्यटन स्थलों पर ऐसे पिंक टॉयलेट उपयोग किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। इसमें सरकार का एक भी पैसा नहीं लगेगा। सीएसआर फंड से इसको तैयार किया जा रहा है। यह एक नवाचार है जो एमपी में पर्यटन विभाग द्वारा किया जा रहा है।
महिला स्वसहायता समूह की सदस्य करेंगी संचालन
उन्होंने कहा कि ऐसी बसों को महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें पुरुषों के लिए भी टॉयलेट होंगे। ऐसी बसों को पर्यटन स्थलों पर महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट के रूप में विकसित कर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका संचालन महिला स्वसहायता समूह की सदस्य करेंगी। इसके साथ ही एक कैफेटेरिया भी जोड़ा गया है जिससे स्वसहायता समूह की आमदनी बढ़ेगी। पिंक टॉयलेट से भी आमदनी होगी।
दो बसें पचमढ़ी और दो ओरछा में रहेंगी
प्रमुख सचिव ने कहा कि ऐसी कंडम बसों में से दो पचमढ़ी और दो ओरछा में तैयार कर पर्यटकों के लिए उपलब्ध कराई जा रही हैं। ऐसे में ऑफ रोड हो चुकी बसों का भी उपयोग हो जाएगा। इन बसों को टॉयलेट के रूप में कन्वर्ट करने में सीएसआर मद से बीस लाख रुपए खर्च हुए हैं। यह मेक माय ट्रिप सीएसआर के अंतर्गत पूरा करा रहा है। इसका फायदा यह है कि पर्यटन स्थल पर सुरक्षित टॉयलेट मिल रहा है।