उज्जैन। झलारिया पीर गांव में खाप पंचायत जैसी सामाजिक बैठक में मंदिर के पुजारी और उनके परिवार पर बहिष्कार का फरमान सुना दिया गया, बच्चों की पढ़ाई से लेकर पूजा, कटिंग और मजदूरी तक पर रोक लगा दी गई। फरमान का उल्लंघन करने वालों पर ₹51 हजार जुर्माने की चेतावनी दी गई।
फरमान सार्वजनिक रूप से गांव के नागराज मंदिर परिसर में माइक पर पढ़कर सुनाया गया। उसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें ग्रामीणों ने हाथ उठाकर सहमति जताई। इस घटना के बाद पुजारी ने कलेक्टर से शिकायत की है, जिस पर जांच के आदेश दिए गए हैं।
मंदिर की जमीन और पुजारी को हटाने का विवाद
करीब 4 हजार की आबादी वाले झलारिया पीर गांव में स्थित देव धर्मराज मंदिर की देखरेख पूनमचंद चौधरी का परिवार वर्षों से करता आ रहा है। मंदिर से लगी करीब 4 बीघा जमीन पर पुजारी खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार के मुताबिक कुछ ग्रामीण मंदिर की जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। उन्होंने मंदिर के जीर्णाेद्धार के नाम पर चंदा इकट्ठा कर लिया, लेकिन उसी राशि से मंदिर दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश की जा रही है, जिसका पुजारी परिवार ने विरोध किया।
पुजारी के बेटे मुकेश चौधरी ने बताया कि विरोध के बाद उन्हें और परिवार को निशाना बनाकर गांव के प्रभावशाली लोगों ने 14 जुलाई को नागराज मंदिर में पंचायत बुलाकर बहिष्कार का फरमान सुना दिया।
क्या है खाप पंचायत जैसा फरमान?
पुजारी पूनमचंद चौधरी और उनके बेटे मुकेश चौधरी के पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।
कोई ब्राह्मण उनके घर पूजा-पाठ के लिए नहीं जाएगा।
कोई नाई उनके यहां दाढ़ी या बाल नहीं काटेगा।
कोई मजदूर उनके खेत या मकान पर काम नहीं करेगा।
सफाईकर्मी भी उनके घर सफाई नहीं करेगा, भले ही कोई जानवर मर जाए।
शादी-ब्याह जैसे आयोजनों में न उन्हें बुलाया जाएगा, न वे जा सकेंगे।
गांव का कोई भी व्यक्ति उनके साथ बैठकर चाय-पानी नहीं पीएगा।
गांव के स्कूलों में पढ़ रहे उनके बच्चों को निष्कासित किया जाएगा।
इन आदेशों का उल्लंघन करने पर ₹51 हजार का जुर्माना लगेगा।
बहिष्कार के बाद बच्चों को स्कूल से निकाला
पुजारी के बेटे ने बताया कि फरमान के अगले दिन ही तीनों बच्चों - 13 वर्षीय संध्या (8वीं), 10 वर्षीय सतीश (5वीं) और 6 वर्षीय विराट (3वीं) को स्कूल से निकाल दिया गया। प्रिंसिपल ने स्पष्ट कहा कि आपके परिवार का विवाद चल रहा है, इसलिए हम बच्चों को नहीं पढ़ा सकते।
बुलाया था, नहीं आए, इसलिए फैसला सुनाया
वीडियो में माइक पर फरमान पढ़ते नजर आए पूर्व पंचायत मंत्री गोकुल सिंह देवड़ा ने कहा कि यह मंदिर सार्वजनिक है और गांव के लोगों ने चंदा इकट्ठा कर जीर्णाेद्धार के लिए ₹6 लाख जुटाए हैं। पुजारी को कई बार समझाने की कोशिश की गई, लेकिन वे नहीं माने और कोर्ट चले गए। 14 जुलाई को पंचायत में बुलाया गया था, लेकिन वे नहीं आए और चौकीदार को भी भगा दिया। इसके बाद सर्व समाज की बैठक में यह फैसला लिया गया।
कलेक्टर से शिकायत, जांच के आदेश जारी
पुजारी पूनमचंद चौधरी ने उज्जैन कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर बताया कि उनका परिवार सामाजिक बहिष्कार का शिकार हो रहा है। उन्हें किसी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जा रहा, बच्चों की पढ़ाई बंद कर दी गई और मजदूर तक काम करने नहीं आ रहे। कलेक्टर ने मामले में जांच के निर्देश दिए हैं।