मनासा/नीमच। मनासा की अधिवक्ता सायरा बानो के साथ आरोपी ऋतिक मालवीय निवासी कुकड़ेश्वर द्वारा पहले मनासा बार में अभद्रता की गई थी। शिकायत करने पर बार संघ द्वारा केवल माफ़ी मंगवाकर मामला शांत कर दिया गया। इसके कुछ दिन बाद, 7 मई 2025 को महिला अधिवक्ता जब कोर्ट से रामपुरा बस से जा रही थीं, तभी कुकड़ेश्वर सीमा में आरोपी ऋतिक ने बस में ही उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
आरोपी ने अधिवक्ता के बाल खींचे, कपड़े फाड़े, गाली-गलौज की और धमकी दी कि अगर पुलिस में शिकायत की, तो वह अपने साथियों के साथ गैंगरेप करेगा। महिला की लज्जा भंग करने के इस गंभीर अपराध की शिकायत जब पुलिस थाने में की गई, तो न सिर्फ कोई संज्ञान नहीं लिया गया बल्कि कुकड़ेश्वर थाने पर अधिवक्ता को दो घंटे तक बैठा रखा गया और आरोपी का पक्ष लिया गया।
परेशान होकर महिला अधिवक्ता एसडीओपी और एसपी कार्यालय पहुंचीं, लेकिन वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद अधिवक्ता ने मुस्लिम इंतजामिया कमेटी नीमच के अध्यक्ष गुलाम रसूल पठान से सहयोग मांगा, जिन्होंने एसपी को ज्ञापन सौंपा। लेकिन आरोपी के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई।
न्याय की उम्मीद न छोड़ते हुए, पीड़िता ने नीमच मुस्लिम इंतजामिया कमेटी की मदद से हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। अधिवक्ता अशरफ वारसी द्वारा की गई प्रभावी पैरवी के बाद हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया कि महिला की शिकायत पर 60 दिनों के भीतर जांच कर एफआईआर दर्ज की जाए। यदि पुलिस संज्ञान नहीं लेती, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्यवाही की जाएगी।
पीड़िता का कहना है कि एक महिला अधिवक्ता को यदि जिला पुलिस और प्रशासन से न्याय नहीं मिलता, तो आम महिलाओं की स्थिति की कल्पना की जा सकती है। यह घटना महिला सशक्तिकरण और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे नारों की सच्चाई पर प्रश्नचिन्ह लगाती है।
सायरा बानो ने मुस्लिम इंतजामिया कमेटी नीमच के अध्यक्ष गुलाम रसूल पठान और उनकी टीम को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया है, जिनकी मदद से वे न्याय के लिए हाईकोर्ट तक पहुंच सकीं।