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July 18, 2025, 11:50 am
KHABAR : अखिल भारतीय साहित्य परिषद् शाजापुर ने किया गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन, गूंजी काव्य सरिता, पढ़े दिलीप सौराष्ट्रीय की खबर

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शाजापुर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, शाजापुर द्वारा गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित काव्य गोष्ठी भाव, भक्ति और काव्य का अद्भुत संगम बन गई। इस आयोजन में साहित्यप्रेमियों को एक अनुपम काव्य यात्रा का अनुभव प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जगदीश भावसार ने की। उन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा, "गुरु का व्यक्तित्व इतना विराट होता है कि शब्द भी छोटे पड़ जाते हैं। वह केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला सच्चा मार्गदर्शक है।"
मुख्य अतिथि डॉ. विद्याशंकर विभूति ने कहा, "भारत आज भी विश्वगुरु है। गुरु-तत्व में अद्भुत ऊर्जा और क्षमता विद्यमान है, बस हमें उसके प्रभावी प्रबंधन की दिशा में कार्य करना होगा।" काव्य गोष्ठी का आरंभ होते ही सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कवि देव शर्मा ने गुरु की महत्ता को भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त किया। परिषद अध्यक्ष जितेन्द्र देवतवाल 'ज्वलंत' ने अपनी ऊर्जावान रचना "अब इतिहास बनाने दो" से श्रोताओं को जोश से भर दिया।

संजय बोराडे ने गुरु पर आधारित विचारों से सभी को भावविभोर किया।
शायर मशहूर शाजापुरी ने हास्य-व्यंग्य से महफिल में ठहाके बिखेरे।
मालवी कवि बालचंद सूर्यवंशी ने क्षेत्रीय संस्कृति की सुगंध बिखेरी।
कवयित्री संतोष शर्मा की रचना "जब-जब बने मां-बाप की पहचान बेटियां" ने भावुकता की लहर पैदा की।
योगेश उपाध्याय ने "मैं जब भी बात करूंगा समता की" से सामाजिक चेतना का संदेश दिया।
नागेंद्र गुर्जर ने व्यंग्य रचना "न कार मिले, न बाइक मिले" से हास्य का रंग जमाया।
राजकुमार अकेले ने "अपना शाजापुर धन-धान्य से है भरपूर" रचना से स्थानीय गौरव को उजागर किया।

कार्यक्रम का संचालन परिषद संरक्षक कैलाश गोंड ने अपनी विशिष्ट शैली में किया।
अंत में अध्यक्ष जितेन्द्र देवतवाल 'ज्वलंत' ने सभी साहित्यकारों, श्रोताओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, "गुरु पूर्णिमा केवल एक दिन नहीं, यह संस्कारों की जीवंत स्मृति है। साहित्य ऐसे आयोजनों से ही जीवित और प्रभावशाली बना रहता है।"

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