इंदौर। बेशकीमती जमीन हथियाने का मामला सामने आया है। इसमें 7 साल के बालक को 18 साल का बताकर जमीन नामे करा ली। 28 साल पुराने इस मामले में हाई कोर्ट के आदेश पर लोकायुक्त ने तत्कालीन जिला खनिज अधिकारी एवं अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1985 की धारा 13 (1), 13(2) एवं भादंवि की धारा 120-बी व 420 के तहत केस दर्ज किया है।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में इस अवधि में पदस्थ रहे इंदौर के तत्कालीन जिला खनिज अधिकारी, लीज एग्रीमेंट से जुड़े कर्मचारी, लीज धारक दीपक वर्मा, शमा खान और अन्य के खिलाफ अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। लोकायुक्त पुलिस मामले में पता लगाएगी कि इस अवधि में इंदौर में कौन-कौन अधिकारी-कर्मचारी पदस्थ रहा और इस मामले से जुड़ा रहा। यह पता चलने के बाद नामजद कार्यवाही की जाएगी।
अब समझते हैं पूरा मामला
मामला नाबालिग बेटे को बालिग बताकर लीज की जमीन हथियाने का है। खनिज विभाग के अधिकारियों ने मिलीभगत कर दस्तावेजों की अनदेखी की और जमीन 10 साल के लिए लीज पर दे दी। 10 साल बाद लीज रिन्यू भी कर दी। इसके 10 साल बाद पट्टाधारी ने लीज एग्रीमेंट अन्य को बेच दिया। इतना ही नहीं, 2018 में तत्कालीन अधिकारियों-कर्मचारियों ने लीज खरीदने वाले के नाम ही 2028 तक के लिए लीज एग्रीमेंट रिन्यू कर दिया।
ऐसे हुआ खुलासा
विवादित जमीन से सटा एक अन्य भू-भाग खनिज उत्खनन के लिए बद्रीलाल को लीज पर दिया गया। बद्रीलाल के खनन पट्टे के क्षेत्र में पहले से दीपक वर्मा को आवंटित जमीन भी आ गई। इस पर उसने हाई कोर्ट की शरण ली। हाई कोर्ट इंदौर के 5 अप्रैल 2024 के निर्देश के पालन में जांच के बाद अपर कलेक्टर इंदौर ने शमा खान को खनन की जमीन से अलग कर दिया और वसूली के आदेश दिए।
फिर रिट पिटीशन की अपील
हाई कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ शमा खान ने रिट पिटीशन लगाई। कोर्ट ने पाया कि दीपक वर्मा ने 18 फरवरी 2017 के एग्रीमेंट के माध्यम से गलत तरीके से लीज शमा खान को बेची थी। इसके लिए खनिज विभाग से कोई मंजूरी नहीं ली गई। शमा खान ने दीपक वर्मा के नाम से आवेदन जमा किया और उसके आम मुख्तियार के रूप में शमा खान के नाम लीज का आवंटन वर्ष 2018 में पूरी तरह विधि विरुद्ध हुआ।