मुरैना। सड़कों पर इन दिनों हालात ऐसे हो गए हैं जैसे पूरा शहर चूहे की चाल चल रहा हो। मुख्यसड़कों से लेकर गली मोहल्लों तक ट्रैफिक जाम आम हो गया है
1-इसका सबसे बड़ा कारण है- बेतरतीब बढ़ती ई-रिक्शा की संख्या और प्रशासनिक लापरवाही।
2-ट्रैफिक पॉइंट बस नाम के लिए-
शहर के कई इलाकों में ट्रैफिक पॉइंट तो बनाए गए हैं, मगर वहां तैनात अधिकारी शायद कहीं और तफरीह कर रहे होते हैं। पॉइंट पर पुलिसकर्मी अक्सर नदारद रहते हैं। जिला अस्पताल जैसे अति संवेदनशील स्थान पर ई-रिक्शा गेट पर ही खड़े हो जाते हैं, जिससे इमरजेंसी सेवा भी बाधित होती है।
मुख्य मार्गों पर रोजाना जाम-
जीवाजीगंज, पुराना बस स्टैंड, कोर्ट रोड, सब्जी मंडी, अस्पताल मार्ग जैसे प्रमुख रास्तों पर दिन में कई बार जाम लगता है। शहर के बीचों-बीच घंटों तक यातायात ठप हो जाता है, मगर ट्रैफिक पुलिस की कोई गंभीरता नज़र नहीं आती।
3-बाइक रेसिंग बनी जानलेवा चुनौती-
रोज शाम को कुछ युवाओं की बाइक रेसिंग ने शहर की सड़कों को खतरनाक बना दिया है। कई दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं, लेकिन न ट्रैफिक पुलिस की नज़र जाती है और न ही कार्रवाई होती है। उल्टे चालान की कार्रवाई उन लोगों पर होती है जो मेहनत-मजदूरी करके लौटते हैं।
दोपहर में ट्रैफिक प्रभारी नदारद-
दोपहर में शहर जाम से जूझता है, पर ट्रैफिक प्रभारी और सूबेदार कहीं नज़र नहीं आते। चेकिंग सिर्फ शाम को दिखाई देती है, वह भी औपचारिकता भर।
मुरैना की जनता की मांग
1. ई-रिक्शा की संख्या और संचालन पर नियंत्रण हो।
2. मुख्य चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की स्थाई तैनाती हो।
3. बाइक रेसिंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।
4. जिला अस्पताल के बाहर यातायात सुचारू किया जाए।
5. सीसीटीवी कैमरों से निगरानी और ट्रैफिक नियंत्रण सुनिश्चित हो।