नीमच। शहर के हृदय में स्थित, वह शहीद पार्क जिसे शहर की शान होना चाहिए था, आज अपनी बदहाली पर आँसू बहा रहा है। रखरखाव के अभाव और नगर पालिका की घोर अनदेखी के चलते ज्ञान मंदिर के पास स्थित यह पार्क गंदगी का ढेर और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन कर रह गया है। यह पार्क, जिसमें शहर के लिए एक शानदार सौगात बनने की पूरी क्षमता है, आज अपने मकसद से कोसों दूर खड़ा है। पार्क की स्थिति देखकर लगता है जैसे इसे सालों से किसी ने देखा ही न हो। सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है, जगह-जगह कचरा और गंदगी का अंबार लगा है। पार्क के चारों ओर लगी फेंसिंग जगह-जगह से टूटी हुई है, गेट भी सही सलामत नहीं हैं, जिससे कोई भी आसानी से अंदर आ-जा सकता है।
नतीजा यह है कि शाम होते ही यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगता है।लोगों का कहना है कि पार्क में लगे पेड़-पौधे उखाड़ दिए गए हैं, और टूटी फेंसिंग के कारण मवेशी भी बेरोकटोक अंदर घुस आते हैं, जिससे पार्क की रही-सही रौनक भी खत्म हो गई है। बच्चों के लिए मनोरंजन के साधन या व्यायाम के लिए कोई उपकरण मौजूद नहीं है, जिससे यह पार्क पूरी तरह से वीरान पड़ा है।
शहरवासियों की मांग है कि नगर पालिका प्रशासन को इस पॉश इलाके में स्थित महत्वपूर्ण पार्क की सुध लेनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि इस पार्क को सही ढंग से विकसित किया जाए, बच्चों के लिए झूले-फिसलनपट्टियां लगाई जाएं, व्यायाम उपकरण लगाए जाएं और उचित साफ-सफाई व सुरक्षा व्यवस्था की जाए, तो यह न केवल शहर की सुंदरता में चार चांद लगाएगा, बल्कि परिवारों और बच्चों के लिए एक सुरक्षित और आनंदमय स्थान भी बनेगा। चौकीदार और बगीचा शाखा के कर्मचारियों को भी अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से निभाने की जरूरत है। यह समय है कि नगर पालिका प्रशासन नींद से जागे और इस महत्वपूर्ण शहरी धरोहर को उसकी वास्तविक चमक दिलाए। शहीद पार्क को नीमच की शान बनाने की सख्त जरूरत है।